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सीनेट में गैलोवे ने किया पलटवार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रितानी सांसद जॉर्ज गैलोवे ने अमरीकी सेनेट में इन आरोपों का कड़े शब्दों में खंडन किया है कि सद्दाम हुसैन के शासनकाल उन्होंने तेल के सौदों से मोटी रकम कमाई थी. जॉर्ज गैलोवे ने सीनेट में चली सुनवाई के दौरान उग्र और आक्रामक तरीक़े से अपना पक्ष रखा और अमरीकी सीनेट के सदस्यों को लाखों इराक़ियों की जान लेने का दोषी ठहराया. इराक़ पर अमरीकी हमले का विरोध करने पर लेबर पार्टी से निकाले गए जॉर्ज गैलोवे ने अलग पार्टी बनाई थी और वे संसदीय चुनाव में लेबर पार्टी की प्रत्याशी को हराकर संसद में पहुँचे हैं. आक्रामक अंदाज़ के लिए मशहूर गैलोवे ने कहा कि वे सद्दाम हुसैन से दो बार मिले थे, उन्होंने अमरीकी सीनेट को याद दिलाया अमरीकी रक्षा मंत्री डॉनल्ड रम्सफ़ेल्ड भी सद्दाम से दो बार मिल चुके हैं. गैलोवे ने कहा, "फ़र्क ये है कि रम्सफ़ेल्ड सद्दाम हुसैन को तोप बेचने गए थे जबकि मैं आर्थिक प्रतिबंध हटवाने और युद्ध की पीड़ा कम करने के मक़सद से गया था." गैलोवे ने कहा कि उनके ऊपर आरोप लगाकर असली मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है, उन्होंने अपने ख़िलाफ़ लगे सभी आरोपों को झूठा और फर्ज़ी बताया. अमरीकी सीनेटरों के सवालों का पैंतालीस मिनट तक उग्र अंदाज़ जवाब देने वाले गैलोवे पर आरोप है कि उनकी कल्याणकारी संस्था ने सद्दाम हुसैन से पैसे लिए थे, तेल के सौदों में भी उनकी संस्था की भूमिका थी. तेल की धार संयुक्त राष्ट्र ने इराक़ पर आर्थिक प्रतिबंध लगने के बाद तेल के बदले खाद्यान्न की योजना शुरू की थी जिसका उद्देश्य इराक़ को सीमित मात्रा में तेल बेचने की अनुमति देना था ताकि इराक़ी जनता की बुनियादी ज़रूरतें पूरी हो सकें. अमरीका का कहना है कि सद्दाम हुसैन ने तेल की सीमित मात्रा उन्हीं लोगों को बेची जो उनकी सत्ता का समर्थन कर रहे थे. गैलोवे जिस 'मरियम अपील' नाम की कल्याणकारी संस्था से जुड़े रहे हैं उसके चेयरमैन फ़वाज़ ज़ूरीकात एक बड़े व्यवसायी हैं और इराक़ में तेल के सौदों में उनकी भूमिका रही है. जॉर्ज गैलोव का कहना है कि यह सही है कि उनकी युद्ध विरोधी संस्था को फ़वाज़ ज़ूरीकात से आर्थिक सहायता मिली लेकिन उस धन का उन्होंने कभी निजी इस्तेमाल नहीं किया. इससे पहले अमरीकी सेनेट रूसी राजनेता व्लादीमिर ज़िरनोव्स्की से भी पूछताछ कर चुकी है, उन पर भी इराक़ के तेल सौदों से लाखों डॉलर कमाने का आरोप है. पिछले वर्ष दिसंबर में लंदन से छपने वाले समाचारपत्र डेली टेलीग्राफ़ को हर्जाने के तौर पर जॉर्ज गैलोवे को डेढ़ लाख पाउंड देने पड़े थे, इस समाचारपत्र ने आरोप लगाया था गैलोवे ने सद्दाम हुसैन से पैसे लिए थे. गैलोवे ने अख़बार के इस आरोप को चुनौती देते हुए मुक़दमा किया था और वे विजयी रहे थे. |
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