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गुरुवार, 12 मई, 2005 को 04:43 GMT तक के समाचार
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गैलोवे ने आरोपों को बेतुका बताया
इराक़
तेल के बदले अनाज कार्यक्रम में भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच चल रही है
अमरीकी सीनेट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन और फ़्रांस के दो वरिष्ठ राजनेताओं को सद्दाम हुसैन ने तेल ख़रीदने की अनुमति दी थी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रितानी सांसद जॉर्ज गैलोवे और फ़्रांस के पूर्व मंत्री चार्ल्स पास्क़ा को सद्दाम हुसैन सरकार ने ये अधिकार संयुक्त राष्ट्र की योजना 'तेल के बदले अनाज' के तहत दी थी.

रिपोर्ट में इसके कोई सबूत नहीं है कि इन दोनों नेताओं में से किसी को धनराशि दी गई. दोनों नेताओं ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा है कि वे ऐसे किसी आवंटन में शामिल नहीं थे.

ब्रितानी सांसद जॉर्ज गैलोवे ने अमरीका की सीनेट समिति द्वारा उनके ऊपर लगाए गए आरोपों को बेतुका बताया है.

गैलोवे ने कहा कि समिति उन पुराने आरोपों को दोहरा रही है जिसे पहले ही ठुकराया जा चुका है. उन्होंने कहा कि उनके ख़िलाफ़ राजनीतिक हमला बुश प्रशासन की शह पर हो रहा है.

इराक़ युद्ध के ख़िलाफ़ अभियान छेड़कर पिछले दिनों ब्रितानी संसदीय चुनाव में जीतने वाले जॉर्ज गैलोवे ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "मैंने कभी तेल बेचने का व्यापार नहीं किया है. यह एक रिपब्लिकन समिति की रिपोर्ट है जो राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के इशारे पर काम कर रही है."

गैलोवे 1990 में इराक़ पर लगाई गई पाबंदी के ख़िलाफ़ थे. इराक़ में अमरीका के नेतृत्व में शुरू हुई सैनिक कार्रवाई का विरोध करने के कारण उन्हें लेबर पार्टी से निकाल दिया गया.

बाद में उन्होंने अपनी रिस्पेक्ट पार्टी का गठन किया और हाल ही में ख़त्म हुए संसदीय चुनाव में लेबर पार्टी के उम्मीदवार को हराकर संसद में पहुँचे.

जवाब

गैलोवे ने कहा कि उन्होंने कई बार लिखकर और ईमेल करके ये अनुरोध किया है कि उन्हें समिति के सामने पेश होने का मौक़ा दिया जाए लेकिन उन्होंने अभी तक इसका जवाब नहीं दिया है.

 मैंने कभी तेल बेचने का व्यापार नहीं किया है. यह एक रिपब्लिकन समिति की रिपोर्ट है जो राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के इशारे पर काम कर रही है
जॉर्ज गैलोवे

फ़्रांसीसी सीनेटर और 1980 और 1990 के दशक में देश के आंतरिक मंत्री रहे चार्ल्स पास्क़ा ने अभी इस दस्तावेज़ पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

लेकिन पिछले महीने जब इस बारे में उनके एक पूर्व सहयोगी से पूछताछ की गई तो पास्क़ा ने कहा था कि वे ऐसी बिक्री में कभी शामिल नहीं थे.

'तेल के बदले अनाज' कार्यक्रम में कथित घोटाले की जाँच कर रही सीनेट समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सद्दाम हुसैन सरकार विदेशों में ऐसे सहयोगी की तलाश में थी जो प्रभावशाली हों.

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सद्दाम हुसैन सरकार ने पास्क़ा को एक करोड़ 10 लाख बैरल तेल ख़रीदने का अधिकार दिया था जबकि जॉर्ज गैलोवे को दो करोड़ बैरल तेल मिले.

समिति का कहना है कि उसे इसके सबूत सद्दाम हुसैन के शासनकाल वाले तेल मंत्रालय के दस्तावेज़ से मिले हैं और उस समय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ में भी ये बातें सामने आईं हैं.

कार्यक्रम

संयुक्त राष्ट्र का तेल के बदले अनाज कार्यक्रम 60 अरब डॉलर का था. 1996 में यह कार्यक्रम इसलिए बना था ताकि इराक़ तेल के बदले खाद्यान्न, दवा और अन्य मानवीय ज़रूरतों का सामान ख़रीद सके.

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आरोप है कि गैलोवे को सद्दाम हुसैन सरकार ने फ़ायदा पहुँचाया

1990 में कुवैत पर इराक़ के हमले के बाद उस पर अंतरराष्ट्रीय पाबंदी लगा दी गई थी. इसी कारण यह योजना लाई गई ताकि इराक़ में जनता ज़रूरी सामान और दवा के लिए न तरसे.

वर्ष 2003 में इराक़ पर अमरीकी कार्रवाई के बाद इराक़ पर से यह पाबंदी औपचारिक रूप से हटा ली गई.

इस कार्यक्रम में भ्रष्टाचार का मामला 2004 के शुरू में सामने आया जब एक इराक़ी समाचारपत्र ने 270 ऐसे लोगों की सूची प्रकाशित की, जिनके बारे में संभावना व्यक्त की गई कि उन्हें ग़ैर क़ानूनी रूप से इराक़ी तेल की बिक्री से लाभ पहुँचाया गया.

इस सूची में संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और कई राजनेताओं के साथ-साथ कई कंपनियों के नाम भी शामिल थे.

आरोप

अमरीकी सीनेट के जाँचकर्ताओं को बाद में पता चला कि सद्दाम हुसैन सरकार ने ग़लत तरीक़े से 17.3 अरब डॉलर कमाए.

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अन्नान की भूमिका पर भी उठे थे सवाल

इनमें से क़रीब 13.6 अरब डॉलर कथित रूप से पड़ोसी देशों को तेल बेचने से आए जो पाबंदी को तोड़ने पर उतारू थे.

संयुक्त राष्ट्र के तेल के बदले अनाज कार्यक्रम में कई तरह के भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और उनकी जाँच भी चल रही है.

इस मामले में संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान की भी आलोचना हुई क्योंकि उनके बेटे भी इस कार्यक्रम में शामिल थे. लेकिन संयुक्त राष्ट्र की एक अंतरिम रिपोर्ट में कोफ़ी अन्नान को क्लिनचिट दे दी गई थी.

इसी मामले पर लंदन के अख़बार डेली टेलिग्राफ ने ब्रितानी सांसद जॉर्ज गैलोवे की भूमिका पर सवाल उठाते हुए एक लेख छापा था. लेकिन गैलोवे इसके ख़िलाफ़ अदालत गए और क़ानूनी कार्रवाई में जीते भी.

लेकिन सीनेट की रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन दस्तावेज़ों के आधार पर उसमें आरोप लगाए गए हैं उसका टेलिग्राफ में छपे लेख से कोई संबंध नहीं है.

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