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अमरीकी कार्टून पर पाकिस्तान में हंगामा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में इन दिनों एक अमरीकी समाचारपत्र में छपे कार्टून को लेकर हंगामा मचा हुआ है और देश के सांसदों ने इस मामले में सरकार से हस्तक्षेप करने की अपील की है. अमरीकी समाचारपत्र वाशिंगटन टाइम्स में छपे कार्टून में एक अमरीकी सैनिक के साथ जो कुत्ता दिखाया गया है उसके ऊपर 'पाकिस्तान' लिखा है. इस कार्टून में 'कुत्ते' ने अल क़ायदा के वरिष्ठ नेता अबू फराज अल लिब्बी को पकड़ रखा है, अमरीकी सैनिक कुत्ते को शाबाशी देते कह रहा है, "गुड बॉय, अब ओसामा बिन लादेन को ढूँढते हैं." कार्टूनिस्ट बिल गार्नर ने सफ़ाई में कहा है कि पाकिस्तान के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का उनका कोई इरादा नहीं था और यह ग़लतफ़हमी 'सांस्कृतिक अंतर' के कारण पैदा हुई है. जिस दिन अख़बार में यह कार्टून प्रकाशित हुआ, वाशिंगटन में पाकिस्तानी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी मोहम्मद सादिक़ ने कहा, "हमें वाशिंगटन टाइम्स के संपादकों की संवेदनशीलता की कमी से बहुत क्षोभ हुआ है." पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमरीकी सरकार ने भी इस कार्टून की निंदा की है और उम्मीद ज़ाहिर की है कि इस पर ज़्यादा प्रतिक्रिया नहीं होगी. लेकिन पाकिस्तान की संसद में सोमवार को भारी हंगामा हुआ और इस कार्टून की निंदा करते हुए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया और सरकार से कहा गया कि वह वाशिंगटन टाइम्स से माफ़ी माँगने को कहे. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और सत्ताधारी पार्टी के अध्यक्ष चौधरी शुजात हुसैन ने नेशनल एसेम्बली में प्रस्ताव रखा और कहा कि सरकार ने इस कार्टून को बहुत गंभीरता से लिया है. संसद को बताया गया कि पाकिस्तानी दूतावास ने अमरीका में वाशिंगटन टाइम्स अख़बार से इसकी बाक़ायदा शिकायत की है. सफ़ाई कार्टूनिस्ट बिल गार्नर ने पाकिस्तानी समाचारपत्र 'डॉन' से बातचीत में कहा है कि "मैं दोस्ती की भावना को प्रदर्शित करना चाहता था, अँगरेज़ी में एक कहावत है--डॉग इज़ मैन्स बेस्ट फ्रेंड." गार्नर का कहना है कि सारी समस्या सांस्कृतिक अंतर के कारण पैदा हुई है क्योंकि अमरीकी संस्कृति में कुत्ते को हेय नहीं बल्कि दोस्त माना जाता है. गार्नर का कहना है कि उनके कार्टून पर जिस तरह की प्रतिक्रिया हुई है वह उनकी आशा के विपरीत है. वाशिंगटन टाइम्स ने इस पूरे विवाद के बाद इसे सांस्कृतिक अंतर बताते हुए अपनी संपादकीय टिप्पणी में लिखा है, "पूरब पूरब है और पश्चिम पश्चिम, दोनों सिरे कभी नहीं मिल सकते." |
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