| पत्रकारों के लिए सबसे ख़तरनाक जगह! | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पत्रकारों के लिए फ़िलीपींस सबसे ख़तरनाक जगह है. इसके बाद इराक़, कोलंबिया, बंगलादेश और रूस का नंबर आता है. ये आकलन है एक स्वतंत्र संस्था का, जिसने विश्व पत्रकारिता दिवस के मौके पर अपनी सालाना रिपोर्ट प्रकाशित की है. पत्रकारों के हितों की रक्षा करने के लिए काम करने का दावा करती न्यूयॉर्क स्थित ये संस्था है 'कमेटी टु प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स.' इस संस्था का कहना है कि इन पांचों देशों में पत्रकारों की मौत के न केवल सबसे ज़्यादा मामले सामने आए हैं बल्कि वहाँ सरकारें पत्रकारों के हत्यारों को पकड़ पाने या सज़ा दिलवाने में भी नाक़ाम रही हैं. संस्था ने जो आँकड़े पेश किए हैं उनसे पता चलता है कि दुनिया भर में काम के दौरान पत्रकारों की मौत के जितने भी मामले सामने आते हैं वे हत्या के मामले होते हैं. आम तौर पर ये माना जाता है कि अति-संवेदनशील इलाकों में, युद्ध स्थलों पर या प्राकृतिक आपदा वाले स्थानों पर जाकर रिपोर्टिंग करना पत्रकारों की जान के जोखिम को और बढ़ाता है. पिछले पाँच सालों में मारे गए पत्रकारों के मामलों में केवल एक तिहाई मामले ही ऐसे हैं जहां पत्रकारों की मौत युद्ध क्षेत्र में गोलाबारी से या ख़तरनाक जगहों पर रिपोर्टिंग के कारण हुई. हक़ीक़त ये है कि दो तिहाई पत्रकारों को अपनी सनसनीख़ेज़ रिपोर्टों की वजह से जान गंवानी पड़ी. संस्था का कहना है कि इन देशों की सरकारें उन लोगों को संरक्षण देती हैं, जो हिंसा के इस्तेमाल से प्रैस की आज़ादी छीनते हैं. संस्था का कहना है कि जहां कोलंबिया, बंगलादेश, इराक़ और फ़िलिपीन्स आंतरिक कलह से जूझ रहे हैं वहीं रूस में चेचन चरमपंथियों की समस्या के अलावा शांति है, लेकिन रूस में पत्रकारों की हत्या के अधिकतर मामले हत्या के हैं. संस्था ने इन सभी देशों की न्याय प्रणाली की भी जमकर निंदा की है, जहां कथित रूप से भ्रष्टाचार के कारण पत्रकारों को न्याय नहीं मिलता. |
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