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बीबीसी के पत्रकारों के लिए नए मानदंड | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी ने अपने पत्रकारों के लिए ख़बरें एकत्रित करने और उन्हें प्रसारित करने के लिए नए मानदंड बनाए हैं. ब्रितानी सरकार के हथियार विशेषज्ञ डेविड केली की आत्महत्या पर हटन आयोग की रिपोर्ट के बाद बीबीसी ने एक कार्यालयीन जाँच शुरु की थी. बीबीसी के गवर्नरों ने रॉन नील की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है. बीबीसी संवाददाता एंड्र्यू गिलिगन की एक रिपोर्ट से इस मामले की शुरुआत हुई थी. 29 मई 2003 को प्रसारित इस रिपोर्ट में एंड्र्यू गिलिगन ने कहा था कि शायद सरकार को इस बात की जानकारी थी कि सरकार के दस्तावेज़ में इराक़ के बारे में किए गए दावे ग़लत हैं. नील रिपोर्ट में कहा गया है कि पत्रकारिता में अपने संवाददाता से प्रसारण के दौरान ही बात करने का अलग महत्व होता है लेकिन जब आरोप गंभीर हो तो इस तरह के प्रयोग नहीं किए जाने चाहिए. रिपोर्ट में कहा गया है कि पत्रकारों को ख़बरें एकत्रिक करते समय बाक़ायदा नोट्स लेने चाहिए. स्रोत का मामला रॉन नील ने कहा है कि एकमात्र स्रोत के आधार पर ख़बरें प्रसारित करना जारी रखा जा सकता है लेकिन तभी जब किसी ख़बर से 'व्यापक जनहित' जुड़ा हो. रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि किसी स्रोत का नाम न बताने की स्थिति बने तो यह बताना चाहिए कि स्रोत का नाम क्यों नहीं बताया जा रहा है. और ऐसी स्थिति में रिपोर्टर को समाचार संपादक को स्रोत का नाम बताना चाहिए. बीबीसी की सटीक और निष्पक्ष ख़बरों की परंपरा को क़ायम रखने की अनुशंसा करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि संस्था को तुरंत अपनी ग़लती सुधारनी चाहिए और खेद ज़ाहिर करना चाहिए. नील रिपोर्ट में कहा गया है कि समाचारों के प्रसारण से पहले संपादक और संपादकीय मामलों में क़ानूनी सलाहकारों की भूमिका बढ़ानी होगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि बीबीसी को पत्रकारों के प्रशिक्षण में सुधार करना चाहिए और पत्रकारिता के लिए एक कॉलेज खोलना चाहिए. रॉन नील ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चूंकि बीबीसी ब्रिटेन में पत्रकारों को रोज़गार देने वाली सबसे बड़ी संस्था है इसलिए पत्रकारों को प्रशिक्षण देने की ज़िम्मेदारी उसी की है. |
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