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मंगलवार, 26 अप्रैल, 2005 को 02:26 GMT तक के समाचार
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कौमार्य के लिए 15 लाख डॉलर की बोली लेकिन....!

ग्रेसिया
ग्रेसिया को बचपन से काम करना पड़ रहा है
पेरु के लीमा शहर के बाहरी हिस्से में एक साधारण से घर में एक ग़रीब परिवार रहता है.

एक 43 साल की बीमार औरत है उसका 12 साल का बेटा है जो स्कूल में पढ़ता है और एक 18 साल की बेटी है ग्रैसिएला.

ग्रैसिएला, जो अपने आपको ग्रेसिया कहलवाना पसंद करती है, इस परिवार की एकमात्र कमाऊ सदस्य है. वह तब से कमा रही है जब उसकी उम्र सिर्फ़ आठ साल की थी.

पंद्रह वर्ष की उम्र में उसे स्कूल जाना भी बंद करना पड़ा. फिर वह एक्टिंग और मॉडलिंग करने लगी और अब वह हर महीने कोई 60 डॉलर यानी लगभग 27 सौ रुपए कमाती है.

वह अपनी बीमार माँ का इलाज करवाना चाहती है और नहीं चाहती कि उसके भाई को स्कूल छोड़ना पड़े.

जो वह कमाती है वह इतना नहीं है कि घर का खर्च और बाक़ी सब ठीक-ठाक चलता रह सके. कभी दवा का बिल है तो कभी भाई स्कूल की किताब के लिए पैसे मांगता है. हालांकि उसके परिवार की स्थिति पेरु के किसी ग़रीब परिवार की तरह ही है लेकिन ग्रेसिया इसी तरह नहीं जीना चाहती थी.

अंतिम निर्णय

पिछले महीने उसने निर्णय लिया कि वह अपना कौमार्य (यानी वर्जिनिटी) बेचेगी जिससे कि उसके परिवार की स्थिति में सुधार किया जा सके.

ग्रेसिया कहती है, "मेरी माँ, मेरा भाई और मैं तीनों बीमार थे. मैं और मेरा भाई पढ़ना चाहते हैं, जीवन में कुछ बनना चाहते हैं लेकिन आपको ये मौक़े नहीं मिल सकते क्योंकि इन सबका ताल्लुक़ पैसों से है."

अपने घर की दीवार की ओर ताकते हुए वह कहती है कि जब आप जब कोई राह नहीं सूझ रही होती तो लगता है कि आप चौराहे पर हैं.

वह कहती है, "और ऐसे समय में आप ऐसा एक रास्ता ढूढ़ते हैं जो एकबारगी आपकी सारी समस्याएँ दूर कर दें. ऐसा ही मैंने सोचा."

इस पैसे से मैं बीमार माँ का इलाज करवा सकती थी, पढ़ाई जारी रख सकती थी और अपने जैसे ग़रीब परिवारों की सहायता कर सकती थी.

विज्ञापन और विवाद

ग्रेसिया बताती है कि उसने अख़बारों, टेलीविज़न और इंटरनेट पर अपना कौमार्य बेचने के लिए विज्ञापन दे दिया.

इसके बाद कैथोलिक ईसाई समाज में उसका विरोध शुरु होने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगा.

ग्रेसिया के परिवार की पुरानी तस्वीर
ग्रेसिया अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारना चाहती थी

उसके इस कदम के बाद एक विवाद ही शुरु हो गया. कुछ लोगों ने कहा कि ग्रेसिया की दिमाग़ी होलत ठीक नहीं है और उसका इलाज करवाना चाहिए तो कुछ लोगों की राय थी कि ऐसा करना वेश्यावृत्ति के दायरे में नहीं आता.

ग्रेसिया का कहना है कि लेकिन कुछ लोग थे जो सोचते थे कि वो ठीक कर रही है क्योंकि कम से कम उन किशोरियों से तो बेहतर थी जो सिर्फ़ इस ग़लतफ़हमी में किसी पार्क में अपना कौमार्य गँवाँ देती हैं.

धीरे-धीरे ग्रेसिया का कौमार्य पेरु के राष्ट्र सम्मान का सवाल बन गया और टेलीविज़न-रेडियो के कार्यक्रमों में इस पर चर्चा होने लगी. कुछ कार्यक्रमों में कहा गया कि ग्रेसिया ने पेरु की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाई है.

पंद्रह लाख डॉलर

लेकिन ग्रेसिया इन सबसे से परे थी, उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था.

 वो चाहता था कि मैं यह न करुं लेकिन यदि मैं ऐसा करने का फ़ैसला करती हूँ तो फिर उसके साथ जाऊँ जो मेरे साथ सम्मान का बर्ताव करे और वो जानता था कि उसकी बोली से ज़्यादा कोई दे नहीं सकता
ग्रेसिया

"मैं तो सिर्फ़ अपना जीवन स्तर सुधारने की कोशिश कर रही थी क्योंकि बचपन से काम करते हुए मैं जान चुकी थी कि मेरे जैसे लोगों के लिए जीवन में कोई अवसर नहीं हैं."

ग्रेसिया कहती हैं कि जो लोग आपत्ति कर रहे थे वे तो कभी ये पूछने नहीं आए थे कि हमारी स्थिति कैसी है, हम कैसे जी रहे हैं.

"मैंने सार्वजनिक रुप से अपनी स्थिति बयान की और किसी ने सामने आकर नहीं कहा कि ठीक है हम आपकी सहायता करेंगे."

अब ग्रेसिया हँसती है कि किस तरह उसके विज्ञापन पर एक कैनेडियन नागरिक सामने आया और उसने उसके साथ यौन संबंध बनाने के लिए पंद्रह लाख डॉलर (यानी कोई 6 करोड़ 75 लाख रुपए) देने का प्रस्ताव किया.

"वो चाहता था कि मैं यह न करुं लेकिन यदि मैं ऐसा करने का फ़ैसला करती हूँ तो फिर उसके साथ जाऊँ जो मेरे साथ सम्मान का बर्ताव करे और वो जानता था कि उसकी बोली से ज़्यादा कोई दे नहीं सकता."

और उसकी ना

आख़िर ग्रेसिया ने अपना कौमार्य बेचने से इंकार कर दिया.

ग्रेसिया बताती है, "और जब मैंने ना कहा तो वह बहुत ख़ुश हुआ."

माँ का सुझाव
 लेकिन मेरी माँ मुझे सुझाव दे रही थी कि यदि मैंने ऐसा किया जैसा मैं करने जा रही थी तो मुझे क्या हासिल होगा. मेरा जीवन कैसा होगा, अपने बच्चों को मैं क्या बता पाउंगी और मैं पैसे से ख़ुश रह सकती हूँ या अपनी क़ाबिलियत से...आदि..."
ग्रेसिया

कौमार्य बेचने के इस विज्ञापन और ग्रेसिया के इंकार के एक महीने बाद उसके परिवार की आर्थिक स्थिति में कोई फ़र्क नहीं आया है.

लेकिन उसकी मानसिकता बहुत बदल गई है. अब वह किसी भी क़ीमत पर अपना कौमार्य नहीं खोना चाहती.

वो बताती है कि वह हर समय अपनी माँ के साथ रहती है और उसकी माँ ने इस निर्णय का विरोध नहीं किया था क्योंकि वो एक वयस्क की तरह एक फ़ैसला कर रही थी.

"लेकिन मेरी माँ मुझे सुझाव दे रही थी कि यदि मैंने ऐसा किया जैसा मैं करने जा रही थी तो मुझे क्या हासिल होगा. मेरा जीवन कैसा होगा, अपने बच्चों को मैं क्या बता पाउंगी और मैं पैसे से ख़ुश रह सकती हूँ या अपनी क़ाबिलियत से...आदि..."

ग्रेसिया कहती है कि वह एक ज़रुरत थी लेकिन वही सब कुछ नहीं है.

और जब कुछ लोग कह रहे हैं कि वह प्रचार पाने का एक तरीक़ा भर था कुछ लोग ये भी तो कह रहे हैं कि उसने कम से कम सामने आकर ये तो कहा कि पेरु में पैसे के लिए कुछ लोग जो कर रहे हैं वो सही नहीं है.

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