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शनिवार, 15 जनवरी, 2005 को 11:57 GMT तक के समाचार
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समलैंगिकता फैलाने वाला बम
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अमरीका ने कई ऐसे अजीबोगरीब बमों पर विचार किया है.
अमरीकी सेना ने एक समय में ऐसे बम बनाने की संभावनाओं पर विचार किया था जिससे दुश्मन सैनिकों में प्यार फैलाया जा सकता.

यह ऐसा बम होता जिसके गिरते ही सैनिक दुश्मनों के खिलाफ़ लड़ाई की बजाय अपने साथियों से प्यार करने लगते

नहीं समझे,तो चलिए स्पष्ट करते हैं. अमरीकी सेना का यह बम होता समलैंगिकता फैलाने वाला. जी हां समलैंगिक बम.

सरकारी दस्तावेज़ के अनुसार अमरीकी रक्षा विभाग लगातार ऐसे कम खतरनाक रसायनों पर काम करता रहा है जिसके इस्तेमाल से दुश्मन सेनाओं के अनुशासन को भंग किया जा सके.

1994 में इस तरह के कई बमों के बारे में प्रस्ताव आए थे जिन पर गंभीरता से विचार किया गया था. इस तरह के बमों के लिए छह साल के शोध के लिए क़रीब 70 लाख डालर का बजट भी निर्धारित किया गया था.

ओहायो के डेटन स्थित अमरीकी वायु सेना राइट लेबोरेटरी ने इस बम पर शोध के लिए पेंटागन से धन की मांग की थी.

1994 की योजना में एक और अनोखे " बदबूदार बम" पर काम शुरु हुआ था. यह बदबू सांसों की होनी थी यानी जब आप मुंह न धोएं तो सोचिए कैसी बदबू आती होगी.

हालांकि इस बम पर काम पूरी नहीं हो सका.

 केवल उन्हीं बमों के प्रस्तावों पर विचार होगा जो अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन न करें
डैन मैस्वीनी

अब अमरीका में सूचना की आज़ादी के आधार पर 1994 की इस योजना के बारे में सभी को पता चल रहा है.

प्यार का बम

समलैंगिक या सैनिकों के बीच प्यार फैलाने वाले बम का ख्याल एक ऐसे रसायन से आया है जिसके बारे में कहा जाता है कि यह लोगों में समलैंगिक भावनाएं जगा देता है.

अमरीकी सेना की सोच है कि इस रसायन के जरिए दुश्मन सैनिकों को बिना मारे अव्यवस्था फैलाई जा सकेगी.

वैज्ञानिक एक और अनोखे रासायनिक बम पर भी काम कर रहे हैं जिसमें दुश्मन सेनाओं पर चूहे, मधुमक्खियों और कीड़ों का हमला कराया जा सकेगा.

इतना ही नहीं कई और बम बन रहे हैं. एक बम सैनिकों में विशेष प्रकार की बू फैला देगा ताकि वो आम लोगों में छुप न सकें.

पेट में गैस

बात यहीं खत्म नहीं होती. एक ऐसे बम पर भी काम हो रहा है जो सैनिकों के पेट में गैस बढ़ा देगा और समझ लीजिए कि पेट में गैस होती है तो लोग क्या करते है.

कभी कभी आवाज़ और कभी बिना आवाज़ के बदबूदार गैस. सरकारी दस्तावेज़ के अनुसार इस बम पर तो 1945 से विचार हो रहा है.

हालांकि शोधकर्ताओं का मानना है कि पूरी दुनिया में कई लोगों को यह बदबू ख़राब नहीं लगती क्योंकि वो लगातार ऐसी बदबू का सामना करते हैं.

पेंटागन की संयुक्त कम ख़तरनाक हथियार निदेशालय के कैप्टन मैकस्वीनी कहते हैं कि ऐसे हज़ारों आइडिया दिए जाते हैं लेकिन 1994 में दिए गए प्रस्तावों में किसी को स्वीकार नहीं किया गया.

उन्होंने बीबीसी से कहा कि केवल उन्हीं प्रस्तावों पर आगे काम के लिए विचार किया जाएगाजो वैध और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के दायरे में रहेंगे.

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