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सिख छात्रों को निकालना सही: अदालत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक फ्रांसीसी अदालत ने स्कूलों में धार्मिक चिन्ह पहनने पर लगाए गए सरकारी प्रतिबंध के तहत तीन सिख छात्रों को एक स्कूल से निकाले जाने के फ़ैसले को सही ठहराया है. इन छात्रों को स्कूल में पटका पहनकर आने यानि कपड़े से सिर ढककर आने के कारण स्कूल से निकाल दिया गया था. इन छात्रों की उम्र 15 से 18 साल तक है और इन्हें पिछले साल नवंबर में पेरिस के नज़दीक लुई-मिशेल नाम के स्कूल से निकाला गया था. अदालत का कहना था कि उनकी वेश-भूषा से तत्काल ये पता चल गया कि वे सिख हैं चाहे उन्होंने पगड़ी नहीं बल्कि पटका पहन रखा था. पिछले साल मार्च में फ़्रांस में एक विवादास्पद क़ानून बनाया गया था जिसका मूल मकसद मुसलमान लड़कियों के हिजाब और किसी भी छात्र के स्कूल में धार्मिक चिन्ह पहनने पर रोक लगाना था. स्कूल से निकाले गए लड़कों के वकील ने कहा है कि वे इस निर्णय के ख़िलाफ़ अपील करेंगे और यदि ज़रूरी हुआ तो यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय तक भी जाएँगे. पेरिस से पत्रकार नूपुर तिवारी का कहना है कि फ़िलहाल इन छात्रों के पास घर में रहकर पढ़ाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. |
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