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शनिवार, 02 अप्रैल, 2005 को 02:21 GMT तक के समाचार
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बीमार पोप को तेज़ बुखार चढ़ा
पोप के लिए प्रार्थना
दुनियाभर में पोप के लिए प्रार्थनाएँ हो रही हैं
वैटकन ने कहा है कि पोप जॉन पॉल चेतना खोने लगे हैं लेकिन वे नीम बेहोशी की अवस्था में नहीं हैं.

वैटिकन ने थोड़ी ही देर पहले एक बयान जारी कर कहा है कि पोप की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है लेकिन वो अपने आसपास उपस्थित लोगों की ओर यदा कदा देखते हैं.

उनकी उपस्थिति में प्रार्थना सभा हुई लेकिन वे ख़ुद इसमें हिस्सा नहीं ले पाए. दूसरी ओर उनके लिए दुनिया भर में लाखों लोग प्रार्थनाएँ कर रहे हैं.

एक प्रवक्ता ने बताया कि उनका रक्तचाप घट गया है और उनके ह्दय और गुर्दा में समस्याएँ आ रही हैं.

वैटिकन के सेंट पीटर्स चर्च के बाहर हज़ारों लोगों की आँखें बंद हैं, उनके हाथों में मोमबत्तियाँ हैं और होंठों पर प्रार्थना के शब्द.

सेंट्स पीटर्स स्क्वॉयर में शुक्रवार रात 70 हज़ार लोगों ने प्रार्थनासभा में हिस्सा लिया. लोग कह रहे थे,'' हमें छोड़ कर मत जाएँ.''

पोप इस समय वैटिकन के अपने अपार्टमेंट में डॉक्टरों और कुछ नज़दीकी सहयोगियों से घिरे आँखें मूँदे बिस्तर पर पड़े हैं.

दुनिया भर में न सिर्फ़ रोमन कैथलिक धर्म के मानने वाले, बल्कि लाखों लोग उनके स्वास्थ्य के बारे में जानने को उत्सुक हैं.

सेंट पीटर्स चर्च का विशाल अहाता रोशनी से जगमगा रहा है और वहाँ एक बहुत गहरी शांति का माहौल है.

ईसाई धर्म को मानने वाले लोग अपने-आप को इस बात के लिए तैयार करते दिख रहे हैं कि पोप अब धीरे-धीरे उनके बीच से उठकर जा रहे हैं.

बीमार

इस वर्ष की शुरूआत से ही पोप का स्वास्थ्य ख़राब रहा है. 2004 के क्रिसमस के समय भी वे अस्वस्थ रहे.

पोप को पहले निमोनिया जैसी शिकायत हुई जिससे उन्हें साँस लेने में तक़लीफ़ शुरू हुई.

पोप
इस वर्ष पोप ज़्यादातर समय बीमार ही रहे

वे कई सप्ताह तक रोम के अस्पताल में रहने के बाद वैटिकन लौटे. उन्हें नाक के ज़रिए प्लास्टिक की ट्यूब से खाना और ऑक्सीज़न देने की नौबत कई बार आई.

इस सप्ताह पोप की हालत तब और बिगड़ गई जब उन्हें मूत्रनली में संक्रमण की शिकायत हुई. गुरूवार से उनकी तबीयत ज़्यादा बिगड़ गई लेकिन उन्होंने अस्पताल जाने से मना कर दिया.

पोप ने अनुरोध किया कि उन्हें बाइबल पढ़कर सुनाई जाए. उन्होंने बाइबल के शब्दों को काफ़ी ग़ौर से सुना.

सीमाओं से परे

पोप दूसरे धर्मगुरूओं की तरह राजनीति में दखल नहीं देने की नीति पर नहीं चले. उन्होंने इराक़ पर अमरीकी हमले का विरोध किया, पोलैंड में कम्युनिस्ट सरकार के ख़िलाफ़ खड़े हुए, फ़लस्तीनियों के साथ न्याय किए जाने की बात कही.

पोप क्यूबा के राष्ट्रपति कास्रो के साथ
पोप ने दुनिया के सौ से अधिक देशों का दौरा किया

यही वजह है कि दुनिया भर में उन्हें धर्मगुरू ही नहीं, न्याय को धर्म का हिस्सा मानने वाले व्यक्ति के रूप में देखा. शायद यही वजह रही कि उनका सम्मान करने वाले दुनिया के हर देश में मौजूद हैं.

कैथोलिक ईसाई संप्रदाय के धर्मगुरू बनने के बाद पोप कभी भी वैटिकन की चारदीवारी के बीच नहीं घिरे रहे और ख़ूब यात्राएँ कीं.

उन्होंने कभी भी राजनीतिक सीमाओं को स्वीकार नहीं किया. वे कई ऐसे देशों में गए जहाँ पहले कोई शीर्ष ईसाई धर्मगुरू नहीं गया.

उदारता

1981 पोप के जीवन का एक अहम वर्ष था जब तुर्की के एक कट्टरपंथी मुस्लिम महमत अली अगका ने वेटिकन में सेंट पीटर्स गिरजाघर के पास पोप को गोली मार दी जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए.

लेकिन पोप ने उदारता की मिसाल पेश करते हुए इस व्यक्ति को माफ़ कर दिया.

उन्होंने न सिर्फ़ माफ़ किया बल्कि अनेक अवसरों पर सदियों पहले ईसाई धर्म मानने वाले लोगों की ज़्यादतियों के लिए दुनिया से क्षमायाचना की.

रोग ने उन्हें कमज़ोर कर दिया लेकिन उनके विचार, उनकी गतिविधियों और जनकल्याण के प्रति उनकी अदम्य प्रतिबद्धता कम नहीं हुई.

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