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अमरीकी ख़ुफ़िया तंत्र की ज़ोरदार खिंचाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में एक आयोग ने अपनी बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट में कहा है कि देश की ख़ुफ़िया व्यवस्था ज़बरदस्त रूप से नाकाम रही जिसके कारण इराक़ युद्ध की नौबत आई. इस अमरीकी राष्ट्रपतिय आयोग ने ये भी कहा है कि अमरीका को अपने सबसे ख़तरनाक शत्रुओं के हथियारों के बारे में भी बेहद कम जानकारी थी. आयोग ने कहा है कि ख़ुफ़िया नाकामी के कारण अमरीका की साख पर जो धब्बा लगा है उसे दूर होने में बरसों लगेंगे. इराक़ युद्ध को लेकर विवाद के बाद अमरीकी राष्ट्रपति ने ख़ुफ़िया जानकारियों की जाँच के आदेश दिए थे. वैसे तो कई स्वतंत्र आयोगों ने इस तरह की जाँच की है मगर ये आयोग ऐसा पहला आयोग था जिसे सीधे राष्ट्रपति बुश ने बिठाया था. इस आयोग का नेतृत्व न्यायाधीश लॉरेंस सिल्बरमैन और पूर्व सेनेटर चार्ल्स रॉब कर रहे थे. अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने रिपोर्ट का स्वागत किया है. ख़ामियाँ जाँच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इराक़ के बारे में ख़ुफ़िया तंत्र असरदार जानकारियाँ जुटा पाने में नाकाम रहा. साथ ही वह ये भी बता सकने में विफल रहा कि जो कुछ समीक्षा वह कर रहा है वह कितना कुछ मात्र अनुमानों पर निर्भर रहा. आयोग ने कहा,"ख़ुफ़िया समुदाय, युद्ध से पहले इराक़ के भारी तबाही वाले हथियारों के संबंध में लिए गए अपने लगभग सभी निर्णयों में बिल्कुल ग़लत रहा". इराक़ से आगे जाकर रिपोर्ट कहती है,"बुरी ख़बर ये है कि हमें अभी भी हथियार कार्यक्रमों के बारे में अधिक कुछ पता नहीं है और अपने सबसे ख़तरनाक शत्रुओं के इरादों के बारे में तो और भी कम पता है". सिफ़ारिशें रिपोर्ट में अमरीका में 15 ख़ुफ़िया एजेंसियों पर निगाह रखनेवाले नए राष्ट्रीय ख़ुफ़िया निदेशक के लिए 70 नई सिफ़ारिशें की हैं. अमरीकी राष्ट्रपति ने इस पद के लिए अनुभवी राजनयिक जॉन नेग्रोपोंटे को चुना है मगर उन्होंने अभी पद ग्रहण नहीं किया है. इस बारे में व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्कॉ मैक्लेलन ने कहा,"हम इन सभी सिफ़ारिशों का सावधानी से अध्ययन करेंगे और फिर उनपर कार्रवाई करेंगे". आयोग ने कहा है कि ख़ुफ़िया सूचनाएँ इसलिए ग़लत साबित हुईं क्योंकि बहुत से लोगों की राय नहीं सुनी गई. आयोग ने उत्तर कोरिया और ईरान पर ख़ुफ़िया एजेंसियों की सूचनाओं की भी जाँच की है मगर इस संबंध में रिपोर्ट में कुछ नहीं लिखा गया है. लेकिन आयोग के सामने गवाही दे चुके एक विशेषज्ञ ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया है कि आयोग ने उत्तर कोरिया पर ख़ुफ़िया एजेंसियों की रिपोर्ट को एक काला धब्बा बताया है और ईरान के बारे में भी आयोग की राय इससे बहुत अलग नहीं है. |
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