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संयुक्त राष्ट्र में सुधारों का समर्थन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पिछले तीन सालों में इराक़ को लेकर जिस तरह का तनाव रहा उसने संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता और भविष्य पर चर्चा को ज़रुरी बना दिया था. हो सकता है कि इस बात पर पूरी दुनिया में सर्वसम्मति हो कि संयुक्त राष्ट्र में परिवर्तन होने चाहिए लेकिन इस बात पर कोई एक राय नहीं है कि ये परिवर्तन किस तरह होने चाहिए. बीबीसी के एक सर्वेक्षण में 23 देशों के लोगों ने संयुक्त राष्ट्र में आमूलचूल परिवर्तन का ज़ोरदार समर्थन किया है. रुस को छोड़कर बाक़ी सभी देशों के लोगों ने इस बात का समर्थन किया है कि सुरक्षा परिषद का विस्तार करके नए स्थाई सदस्यों को शामिल किया जाना चाहिए. जिन पाँच देशों की सदस्यता की चर्चा चल रही है उनमें जर्मनी और जापान सबसे आगे हैं लेकिन विकसित देशों की तुलना में विकासशील देश पीछे रह गए हैं. जापान की सदस्यता का उसके पड़ोसी चीन, कोरिया और रुस विरोध कर रहे हैं. हालाँकि इस दौड़ में भारत और ब्राज़ील बहुत पीछे नहीं हैं लेकिन दक्षिण अफ़्रीका इसमें काफ़ी पीछे है. दक्षिण अफ़्रीका के पिछड़ने रहने के पीछे एक कारण तो यह भी हो सकता है कि वही एकमात्र अफ़्रीकी देश था, जहाँ सर्वेक्षण किया गया. जिन देशों में सर्वेक्षण किया गया उनमें से एक को छोड़कर बाक़ी सभी देशों के लोगों ने कहा कि सुरक्षा परिषद को ये अधिकार दिए जाने चाहिए कि वह किसी भी स्थाई सदस्य के वीटो को ख़ारिज कर सके. इसमें स्थाई सदस्य देश अमरीका, चीन और ब्रिटेन शामिल हैं हालाँकि इन देशों की सरकारें इस तरह के प्रावधानों के ख़िलाफ़ हैं. संयुक्त राष्ट्र को ज़्यादा ताक़तवर बनाने को भी 23 देशों में हुए सर्वेक्षण में व्यापक समर्थन मिला है. |
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