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अमरीका ने ईरान पर रुख़ नरम किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका की विदेश मंत्री ने ईरान के मामले में अपनी नीति में परिवर्तन की घोषणा की है. अमरीका ने यूरोपीय देशों के साथ मिलकर ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन दिए जाने की नीति का समर्थन करने का फ़ैसला किया है. अमरीका की विदेश मंत्री कॉन्डोलिज़ा राइस ने कहा है कि उनका देश ईरान के विश्व व्यापार संगठन का सदस्य बनने पर आपत्ति नहीं करेगा. इन क़दमों का उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने और यूरेनियम का संवर्धन करने से रोकना है. बीबीसी के वाशिंगटन स्थित संवाददाता ने इस फैसले को अहम बताते हुए कहा है कि अमरीका ने एक तरह से स्वीकार कर लिया है कि उसकी पुरानी नीति से कुछ हासिल नहीं हो रहा था. अमरीका के बुश प्रशासन का अब तक यही कहना रहा था कि अपनी अंतरराष्ट्रीय ज़िम्मेदारियाँ पूरी करने के बदले ईरान को कोई इनाम देने का कोई मतलब नहीं है. बदली राय लेकिन अब लगता है कि अमरीकी राष्ट्रपति की राय इस बारे में बदल गई है, ख़ास तौर पर इस मुद्दे पर यूरोपीय देशों से बातचीत के बाद. हाल में अपने यूरोप के दौरे में अमरीकी राष्ट्रपति ने जर्मनी और बेल्जियम में ईरान के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की है. बुश के हाल के दौरे के बाद से ऐसे संकेत उभरने लगे हैं कि ईरान के मामले पर अमरीका और यूरोपीय देशों के बीच समन्वय बढ़ रहा है. बुश प्रशासन ईरान से बातचीत कर रहे यूरोपीय देशों--ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस से संपर्क बनाए हुए है. अब अमरीकी राष्ट्रपति ख़ुद ही कह रहे हैं कि वे ईरान से बातचीत आगे बढ़ाने को तैयार हैं. जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने कहा, "मुझे इस बात की बहुत ख़ुशी है कि हम और हमारे यूरोपीय साझीदार देश ईरान के मामले में एक ही स्वर में बात कर रहे हैं.'' उनका कहना था,''मैं अपने यूरोपीय दोस्तों के साथ मिलकर ईरान के सामने बिल्कुल स्पष्ट करना चाहता हूँ कि आज़ाद ख्याल दुनिया के देश उसे परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दे सकते." तनाव में कमी इससे पहले अमरीकी विदेश मंत्री कॉन्डोलिज़ा राइस ने दुनिया के सामने अपना प्रस्ताव रखा था कि अमरीका विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ की सदस्यता के ईरानी आवेदन पर एतराज़ नहीं करेगा.
उन्होंने यह भी कहा कि असैनिक विमानों के कल-पुर्जों हासिल करने में आने वाली रूकावटों को भी हटा दिया जाएगा. ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमरीका और ईरान के संबंधों में दशकों से चला आ रहा तनाव और गहरा गया था. अमरीका ने कभी भी ईरान के ख़िलाफ़ बलप्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया था. इससे कुछ लोगों को लगने लगा था कि अमरीका ईरान की इस्लामी हुकूमत उसका अगला निशाना बना सकता है. अमरीका के रूख़ में इस ताज़ा परिवर्तन से तनाव में कुछ कमी तो ज़रूर आएगी. |
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