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ग़रीब देशों की आबादी 2050 तक दोगुनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र ने एक सर्वेक्षण के बाद कहा है कि वर्ष 2050 तक दुनिया के सबसे ग़रीब 50 देशों की जनसंख्या दोगुनी हो जाएगी. जबकि इसी समयावधि में सबसे धनी देशों की जनसंख्या यथावत बनी रहेगी. 'वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉस्पेक्ट्स 2004' में कहा गया है कि 2050 तक दुनिया की आबादी साढ़े छह अरब से बढ़कर नौ अरब हो जाएगी. संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट देशों की जनगणना, जनसंख्या सर्वेक्षणों और आबादी बढ़ने के रुझानों के आधार पर तैयार की गई है. भारत और चीन और इस जनसंख्या के बढ़ने में ज़ाहिर है भारत का योगदान भी काफ़ी होगा. रिपोर्ट के अनुसार इतनी तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या में सबसे ज़्यादा योगदान होगा 8 देशों का.
ये हैं – भारत, पाकिस्तान, नाइजीरिया, कॉन्गो गणराज्य, बांग्लादेश, युगांडा, अमरीका, इथियोपिया और चीन. आज दुनिया के दस लोगों में से 4 भारत या चीन में रहते हैं और दुनिया की सबसे बड़ी आबादी चीन में रहती है. लेकिन वर्ष 2005 तक भारत आबादी के मामले में चीन को भी पीछे छोड़ देगा. उस समय दुनिया में हर दूसरा आदमी या तो भारतीय होगा या चीन का. भारत भले ही 2050 में सबसे बड़ी आबादी वाला देश हो लेकिन तब तक कई देश भारत से भी तेज़ी से बढ़ रहे होंगे. वर्ष 2050 तक अफ़ग़ानिस्तान, चाड और कॉन्गो गणराज्य की आबादी आज से तीन गुना ज़्यादा बढ़ चुकी होगी. इसके अलावा बांग्लादेश जैसे छोटे देश की जनसंख्या भी इतनी तेज़ी से बढ़ रही है कि वर्ष 2050 तक वो दुनिया के सबसे ज़्यादा आबादी वाले दस देशों की गिनती में आ जाएगा. दो और नए देश इस सूची में नए होंगे – कॉन्गो गणराज्य और इथियोपिया. दो विपरीत परिस्थियाँ इस रिपोर्ट में दुनिया के ग़रीब और धनी देशों में आबादी बढ़ने की दो एकदम विपरीत परिस्थियाँ दिखाई गई हैं. इस रिपोर्ट में जहाँ 50 सबसे ग़रीब देशों की आबादी दोगुनी होने की बात कही गई है वहीं अफ़ग़ानिस्तान, चाड और कांगो जैसे देशों की आबादी तीन गुना हो जाने की संभावना बताई गई है. संयुक्त राष्ट्र के जनसंख्या प्रभाग की निदेशक हाइना ज़्लोतनिक का कहना है, "इन देशों में जन्म और म़त्युदर काफ़ी अधिक है और इन देशों की आबादी तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन ये देश लोगों को ज़रुरत की मूलभूत चीज़ें भी मुहैया नहीं करवा पा रहे हैं." इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के दूसरे हिस्सों के विपरीत अफ़्रीका में औसत आयु में लगातार कमी आई है. रिपोर्ट के अनुसार इसका कारण एचआईवी एड्स तो है ही लेकिन इसके अलावा कई और संक्रामक बीमारियाँ, हिंसक झड़पें और आर्थिक विकास में अवरोध मुख्य वजहें हैं. लेकिन दूसरी ओर रिपोर्ट में कहा गया है कि विकसित देशों की जनसंख्या ज्यों की त्यों बनी रहेगी जो इस समय लगभग 1.2 अरब है. जापान, जर्मनी और रुस और पूर्व सोवियत संघ के कुछ देशों में जन्मदर काफ़ी कम है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यदि विकसित देशों में जनसंख्या बढ़ती है तो उसकी वजह अंतरराष्ट्रीय प्रवासन होगा. |
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