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बुधवार, 18 अगस्त, 2004 को 15:32 GMT तक के समाचार
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'भारत की आबादी चीन से अधिक होगी'
भारत की आबादी
भारत की आबादी बढ़ने और कई देशों की घटने संभावना है
एक नए शोध के अनुसार वर्ष 2050 तक भारत विश्व के सबसे बड़ी आबादी वाले देश चीन से भी आगे बढ़ जाएगा.

उधर दूसरी तरफ़ कुछ अन्य देशों की आबादी 40 प्रतिशत कम हो जाएगी.

शोध करने वाली वाशिंगटन स्थित एक संस्था पॉपुलेशन रेफ़रेंस ब्यूरो का कहना है कि आने वाले वर्षों में विश्व भर में आबादी की वर्तमान तस्वीर में बहुत उलट फेर होने वाला है.

ब्यूरो के शोध के अनुसार 2050 तक धरती पर रहने वाले लोगों की आबादी आज की छह अरब 30 करोड़ से बढ़ कर नौ अरब 30 करोड़ हो जाएगी.

2050 तक संभावित आबादी
भारतः 1.62 अरब
चीनः 1.43 अरब
अमरीकाः 42 करोड़
इंडोनेशियाः 30 करोड़
नाइजीरियाः 30 करोड़

ब्रिटेन फ़्रांस से आगे बढ़ जाएगा जबकि अमरीका की आबादी 50 प्रतिशत तक बढ़ेगी.

शोध के अनुसार जनसंख्या पर किए गए नए अध्ययन में पाया गया है कि आम तौर पर जहाँ पश्चिम के विकसित देशों में जनसंख्या के कुछ कम होने के संभावना है वहाँ विकासशील देशों में जनसंख्या का बढ़ना जारी रहेगा.

संगठन का कहना है कि अब तक जनसंख्या में जो वृद्धि हुई है उसमें 99 प्रतिशत गरीब देशों में हुई है.

भारत के बारे में अनुमान है कि इसकी आबादी चीन से बहुत आगे बढ़ जाएगी और अमरीका तीसरे स्थान पर बना रहेगा.

ब्रिटेन की आबादी के जहाँ कुछ बढ़ने का अनुमान लगाया गया है वहाँ यूरोप के बहुत से देशों में आबादी के कम होने की संभावना व्यक्त की गई है.

आधार

ये निष्कर्ष विभिन्न देशों मे बच्चों की मृत्यु दर, वहाँ के लोगों की संभावित आयु, जन्म दर, गर्भ निरोधक के प्रति लोगों की प्रवृत्ति और एड्स बीमारी के प्रसार के आधार पर निकाला गया है.

 जनसंख्या संबंधी इतनी सारी असमानताएं बनी हुई हैं कि भविष्य के बारे में निश्चित रूप से कुछ कह पाना कठिन है
कार्ल हौब

लेकिन अध्ययन ये नहीं बता सकता कि लोगों का एक देश से दूसरे देश में जा कर बसने से जनसंख्या पर क्या प्रभाव पड़ेगा.

इस संगठन के अध्यक्ष कार्ल हौब ये मानते हैं कि ये जानना संभव नहीं है कि वास्तव में ये वृद्धि कैसे होगी.

कार्ल हौब कहते हैं,"जनसंख्या संबंधी इतनी सारी असमानताएं बनी हुई हैं कि भविष्य के बारे में निश्चित रूप से कुछ कह पाना कठिन है."

वैसे हाल में जनसंख्या पर किए गए लगभग सभी अध्ययन ये मानते हैं कि निकट भविष्य में जनसंख्या में तेज़ी से वृद्धि होगी और धरती पर संसाधन सिमटते जाएँगे.

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