|
यूक्रेन के चुनाव में विवाद ही विवाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूक्रेन में नवंबर के महीने में हुए राष्ट्रपति चुनाव हुए लेकिन इनके परिणामों पर ऐसा विवाद हुआ कि मतदान का एक पूरा दौर दोबारा हुआ. परिणाम भी बिल्कुल उलटे रहे. नवंबर माह में हुए चुनावों में जीत मिली थी प्रधानमंत्री विक्टर यानुकोविच को पर लोग उनके विरोध में सड़कों पर उतर आए. विपक्षी उम्मीदवार विक्टर युशैंको का कहना था कि मतदान में धांधली हुई है. क़रीब एक हफ्ते तक हज़ारों लोग परिणामों के विरोध में सड़को पर जमे रहे. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों ने इस मसले को सुलझाने की अपील की. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई की और राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर का मतदान फिर से कराने का निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने एक तरह से माना कि चुनाव में धाँधलियाँ हुई थीं. इस फ़ैसले को विपक्षी नेता विक्टर युशैंको खुश हुए और फिर तैयारी शुरु हुई 26 दिसंबर को होने वाले दूसरे दौर की. आरोप प्रत्यारोप सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से प्रधानमंत्री यानुकोविच खुश नहीं थे और उन्होंने अदालत पर राजनीतिक फैसला देने का आरोप भी लगाया.
दोनों नेताओं ने चुनाव प्रचार में एक दूसरे पर जमकर छीटाकशी की. इसी दौरान ख़बरें आई कि विपक्षी नेता युशैंको को कुछ दिन पहले ज़हर दिया गया था. उनके प्रति लोगों का समर्थन बढ़ता ही गया और यानुकोविच का समर्थन घटने लगा. यानुकोविच को बारे में कहा जाता है कि वो रुस समर्थक हैं जबकि युशैंको को पश्चिमी देशों का समर्थन मिला हुआ है. 26 दिसंबर को मतदान के दूसरे दौर के बाद चुनाव आयोग ने युशैंको को विजयी घोषित कर दिया लेकिन यानुकोविच का कहना था कि मतदान में धांधली हुई है. यानुकोविच ने कहा कि वो इसके ख़िलाफ अपील करेंगे लेकिन फिलहाल यूक्रेन की सत्ता युशैंको के हाथ में चली गई है और नए साल में यूक्रेन की जनता को नया नेता मिला है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||