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यूक्रेन में मतदान से ठीक पहले नया संकट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूक्रेन में एक बार फिर राष्ट्रपति चुनावों को लेकर नया संकट पैदा हो गया है. यूक्रेन की एक अदालत ने फ़ैसला दिया है कि देश के चुनावी क़ानून में किया गया एक महत्वपूर्ण बदलाव संविधान का उल्लंघन करता है. ये क़ानून घर से मतदान करने वालों के लिए है. क़ानून में सुधार के तहत घर से मतदान करने को सीमित कर दिया गया था. नवंबर में हुए विवादित चुनाव के बाद देश की संसद ने चुनाव सुधार संशोधन पारित किया था. लेकिन प्रधानमंत्री विक्टर यानूकोविच के समर्थकों ने इसका विरोध किया था और इसे अदालत में चुनौती दी थी. यानूकोविच समर्थकों का कहना है कि यह बदलाव ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ है जो विकलांग हैं या फिर जो घर संभाल रहे हैं. राष्ट्रपति चुनाव में यानूकोविच के मुक़ाबले हैं विपक्षी नेता विक्टर युशचेन्को. संसद द्वारा पारित संशोधनों के बाद ही रविवार को राष्ट्रपति चुनाव का दूसरा दौर दोबारा करवाया जा रहा है. चुनाव आयोग के प्रमुख यारोस्लाव डेवीदोविच ने कहा है कि अदालत के फ़ैसले का ध्यान रखते हुए रविवार को होने वाला मतदान तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगा. उन्होंने कहा, "हमारे पास दूसरा कोई रास्ता नहीं. मतदान ज़रूर होगा." हालाँकि अब अदालत के फ़ैसले के बाद निर्वाचन अधिकारियों को उन मतदाताओं से मतपत्र भी स्वीकार करने होंगे जिनका नाम ऐसे लोगों की सूची में दर्ज है जो मतदान केंद्र तक नहीं आ सकते. विवाद बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि घर से मतदान करने का मुद्दा ही दोनों पक्षों में विवाद का विषय था और इसी को आधार मानकर मतदान में धाँधली के आरोप लगाए गए थे.
यूक्रेन में राष्ट्रपति पद के लिए नवंबर में चुनाव हुए थे जिसके बाद परिणामों को लेकर ख़ासा विवाद हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने दूसरे दौर का मतदान दोबारा कराने का आदेश दिया. नवंबर चुनावों के परिणामों को लेकर जारी विवाद को खत्म करने के लिए यानूकोविच और युशचेन्को के बीच समझौता हुआ था और क़ानूनों में सुधार की बात की गई थी. आठ दिसंबर को क़ानूनों में सुधार किए गए थे. बीबीसी के हेलेन फॉक्स का कहना है कि अदालत का यह फैसला विपक्ष के लिए झटके के समान है क्योंकि विपक्ष ने यानूकोविच पर आरोप लगाया था कि उनके समर्थकों ने मतदान पेटियों में मतपत्र भरे. संवाददाताओं का कहना है कि घर बैठकर वोट डालने का मामला विवाद का विषय रहा है. यही कारण है कि क़रीब 12000 अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इन चुनावों पर निगरानी की पूरी तैयारी कर चुके हैं. कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि किसी भी क़ानून को अब बदलना चुनावों पर प्रभाव डालेगा. |
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