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दाम चाहिए, जेल जाइए ! | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कुछ ऊपरी आमदनी करना चाहते हैं? तो जेल जाइए ! बहुत से लोग भले ही त्यौहार के मौसम में जेल जाने की सलाह पर भड़क उठें मगर हॉलैंड में कुछ लोगों के लिए ये ऊपरी कमाई का तरीक़ा है. बड़े दिन यानी क्रिसमस की छुट्टियाँ के दौरान अर्द्ध-मुक्त जेलों के कुछ क़ैदी अपनी जेब से पैसा ख़र्च करके बाक़ायदा दूसरों को अपनी जगह जेल काटने पर तैयार कर लेते हैं. हॉलैंड के अपराधी इन दिनों कई ऐसे लोगों से संपर्क कर रहे हैं जो क्रिसमस की छुट्टियों के दौरान कुछ पैसे के बदले उनकी जगह जेल में रहने को तैयार हो जाएँ. सांसदों ने इस ख़बरों पर चिंता जताई है और कहा है कि न्यायमंत्री को इस मामले पर सफ़ाई देनी चाहिए. गड़बड़झाला एक वकील रॉब मालेविश्ज़ ने कहा कि मारपीट और नशीले पदार्थ बेचने के जुर्म में सज़ायाफ़्ता दो लोगों ने इस गड़बड़झाले के बारे में और जानकारी दी. हुआ ये कि ये दोनों सज़ायाफ़्ता अपराधी किसी मुद्दे पर सलाह लेने के लिए वकील के दफ़्तर पहुँचे. पूछने पर पता लगा कि उनकी जगह कोई दूसरे ही लोग जेल काट रहे हैं और इस सेवा के बदले उन्हें मानदेय दिया गया है. ये अर्द्ध-मुक्त कारागार ऐसे हैं जहाँ छोटे मोटे अपराधों के लिए एक साल से अठारह महीने की सज़ा काट रहे मुजरिम बंद हैं. कई बार उन्हें बाहर आने जाने की इजाज़त भी दे दी जाती है. बाहर तो वो चले जाते हैं, लेकिन लौटता उनकी जगह कोई और ही है. अपराधियों की चाँदी? ख़बरों में कहा गया है कि इन जेलों में कोई बहुत कड़ाई से जाँच पड़ताल नहीं की जाती, इसलिए अपराधी चाँदी काट रहे हैं. जेल अधिकारियों की यूनियन का कहना है कि जेल के कर्मचारियों को पहचानपत्र आदि काग़ज़ात की पड़ताल करने के लिए पर्याप्त ट्रेनिंग नहीं दी जाती है. अभी तक तो इस मामले में कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई है, लेकिन अगर हुई तो पकड़े गए व्यक्ति पर क्या आरोप होगा? यही कि वो व्यक्ति जेल जाने की कोशिश करते हुए गिरफ़्तार किया गया. लेकिन क्रिसमस में किसे परवाह है. ऊपरी आमदनी के लिए ये भी सही !! |
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