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'भोपाल गैसकांड पीड़ितों को न्याय नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भोपाल गैस कांड के पीड़ितों की सहायता कर पाने या दोषियों को सज़ा दिलवा पाने में विफल रहा है. एमनेस्टी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि अमरीकी कंपनी यूनियन कार्बाइड ने भोपाल हादसे के मुआवज़े के तौर पर भारत सरकार को 50 करोड़ डॉलर दिए थे मगर अधिकतर राशि का वितरण नहीं हो सका. दिसंबर 1984 में हुए भोपाल गैस हादसे में लगब 15 हज़ार लोग मारे गए थे. लंदन स्थित एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नए अध्ययन से पता चला है कि 7,000 लोग गैस लीक होने के तत्काल बाद मारे गए थे जबकि 1984 के बाद से अब तक गैसकांड की चपेट में आनेवाले 15,000 लोगों की जान जा चुकी है. गैसकांड की चपेट में आनेवाले जो लोग बच गए उनमें से कई अभी भी साँस की तकलीफ़ और अन्य तकलीफ़ों के शिकार हैं. रिपोर्ट में कहा गया है,"एक लाख से भी अधिक लोग कभी ठीक ना हो पानेवाली बीमारियों से ग्रस्त हो गए हैं." मुआवज़े में देरी
एमनेस्टी का कहना है कि भोपाल गैस कांड को हुए दो दशक हो चुके हैं मगर अभी भी पीड़ितों को पर्याप्त मुआवज़ा नहीं मिल सका है. 82 पन्नों की अपनी रिपोर्ट में एमनेस्टी ने लिखा है,"पीड़ितों की इंसाफ़ पाने की लगातार जारी कोशिशों के बावजूद अधिकतर लोगों को अपर्याप्त मुआवज़ा या चिकित्सकीय राहत मिल सकी है." रिपोर्ट के अनुसार 1989 में यूनियन कार्बाइड ने मुआवज़ा देना तय किया मगर पाँच लाख 70 हज़ार पीड़ितों को अभी मुआवज़े की दूसरी किश्त ही मिलनी शुरू हुई है. पिछले 15 नवंबर से ऐसे लोगों को लगभग 35 करोड़ डॉलर की राशि दिया जाना शुरू हुआ है जिनके दावों को स्वीकार किया गया है. नाकामी एमनेस्टी ने अपनी रिपोर्ट में ये भी कहा है कि भोपाल गैस कांड पीड़ितों को ना तो अमरीका और ना भारत की अदालतों से समुचित न्याय मिल सका है. अमरीका में एक अदालत का इस बारे में फ़ैसला आना बाक़ी है कि भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारख़ाने की सफ़ाई का ख़र्च और पीड़ितों को मुआवज़े की ज़िम्मेदारी अभी भी यूनियन कार्बाइड को ही उठानी है या नहीं. उधर भोपाल में भी इस संबंध में एक मामला अभी तक अदालत में लंबित है. एमनेस्टी का कहना है कि डाउ केमिकल्स नाम की एक बड़ी कंपनी का अंगर बन चुकी यूनियन कार्बाइड को 1989 में हुई सहमति के बावजूद अभी भी भोपाल गैस कांड के मुक़दमे में शामिल किया जाना चाहिए. मगर डाउ केमिकल्स इससे इनकार करती है. |
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