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इराक़ के भविष्य के बारे में बैठक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मिस्र के शहर शर्म-अल-शेख़ में इराक़ के भविष्य के बारे में विचार के लिए एक बैठक हो रही है. इस बैठक में इराक़ और मिस्र के अलावा इराक़ के छह पड़ोसी देशों के विदेश मंत्री हिस्सा ले रहे हैं. अगले दिन मंगलवार को दुनिया के आठ अमीर देशों के संगठन जी-8 के सदस्य देशों और चीन के विदेश मंत्री भी आएँगे. उनके अलावा संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, अरब लीग और इस्लामिक कॉंफ़्रेंस ऑर्गेनाइज़ेशन जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी सम्मेलन के लिए जुट रहे हैं. इराक़ की अंतरिम सरकार का मानना है कि इस सम्मेलन से उनकी वैधता को मज़बूती मिलेगी. इराक़ी सरकार को उम्मीद है कि इस सम्मेलन से इराक़ के भविष्य पर सर्वसम्मति से कोई राय बन सकेगी. मगर शर्म-अल-शेख़ में उपस्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस बैठक की तैयारियों के समय ही काफ़ी विवाद हुए जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय तौर पर इराक़ को लेकर मतभेद कायम हैं. मतभेद फ़्रांस और अरब लीग ये मानते हैं कि इराक़ से विदेशी सैनिकों की वापसी के लिए कोई समयसीमा निर्धारित की जानी चाहिए मगर अमरीका और ब्रिटेन ऐसा नहीं चाहते. फ़्रांस ने इस बात के लिए भी ज़ोर दिया कि इराक़ में अंतरिम सरकार का विरोध करनेवाले गुटों के प्रतिनिधियों को भी बैठक के लिए बुलाया जाए मगर उसकी बात नहीं मानी गई. कूटनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि शर्म-अल-शेख़ की बैठक से कुछ बड़ा हासिल होने की उम्मीद कम ही है. मगर ईरान कह चुका है कि वह बैठक में अमरीकी कार्रवाई का पुरज़ोर विरोध करेगा. उधर बैठक से ठीक पहले दुनिया के धनी देशों ने इराक़ के 30 अरब डॉलर के कर्ज़ को माफ़ करने का फ़ैसला किया. ये राशि पूरी दुनिया से लिए गए इराक़ के कर्ज़ का एक चौथाई हिस्सा है. |
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