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इराक़ की स्थिति पर रेड क्रॉस चिंतित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति ने कहा है कि इराक़ की लड़ाई में सभी पक्ष 'मानवता का अपमान' कर रहे हैं. अपने मुख्यालय जेनेवा से जारी कड़े बयान में रेड क्रॉस ने कहा है कि इराक़ में जारी संघर्ष का वहाँ की जनता पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है. रेड क्रॉस ने इराक़ में चल रही लड़ाई में शामिल सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनों का पालन करने को कहा है. संस्था का कहना है कि निर्दोष लोगों की हत्या के साथ-साथ लोगों को बंधक बनाना अंतरराष्ट्रीय क़ानून के ख़िलाफ़ है. रेड क्रॉस का कहना है कि पीड़ित लोगों तक सहायता कार्य पहुँचाने के लिए राहत एजेंसियों को अनुमति मिलनी चाहिए. पिछले इराक़ में राहत और सहायता कार्यों में जुटी मारग्रेट हसन की हत्या कर दी गई थी तो फ़लूजा में एक घायल विद्रोही को अमरीकी सैनिकों ने गोली मार दी थी. रेड क्रॉस ने अपने बयान में इन दोनों घटनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. संस्था का कहना है कि ऐसी घटनाएँ मानवता के बुनियादी सिद्धांतों की अवमानना करती हैं. अंतरराष्ट्रीय क़ानून बयान में कहा गया है कि इराक़ की लड़ाई में शामिल पक्ष ये ध्यान रखें कि निर्दोष लोगों की हत्या और लोगों को बंधक बनाना अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के ख़िलाफ़ है.
रेड क्रॉस ने अपने बयान में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून का पालन करना सिर्फ़ एक विकल्प नहीं बल्कि उनकी बाध्यता है. संस्था ने युद्ध के दौरान मानवीय सहायता की स्थिति पर भी आपत्ति जताई है और कहा कि ऐसी स्थिति में फँसे लोगों तक राहत और सहायता कार्य पहुँचाने की अनुमति होनी चाहिए ताकि उन्हें खाना-पानी और चिकित्सा सहायता मिल सके. रेड क्रॉस ने कहा है कि दुर्भाग्य से हाल की कई घटनाओं से यह पता चला है कि सहायता एजेंसियों को पीड़ित लोगों तक पहुँचने में कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. पिछले साल अपने बग़दाद स्थित कार्यालय पर आत्मघाती बम हमले के बाद रेड क्रॉस ने अपने कर्मचारियों को वापस बुला लिया था. लेकिन इराक़ी रेड क्रिसेंट फ़लूजा में लोगों तक सहायता पहुँचाने के लिए कोशिश में लगा है. लेकिन अमरीकी सैनिक कार्रवाई के कारण इसमें लगातार रुकावट आ रही है. |
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