|
कॉलिन पॉवेल ने इस्तीफ़ा दिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने कहा है कि वे अपने पद से इस्तीफ़ा देनेवाले हैं. पॉवेल ने सोमवार को अपने इस्तीफ़े की जानकारी देते हुए कहा कि वे तबतक मंत्रीपद का दायित्व सँभालेंगे जब तक कि अमरीकी संसद का उच्च सदन सीनेट उनके उत्तराधिकारी के नाम की पुष्टि नहीं कर देता. उन्होंने ये भी कहा कि वे हमेशा यही मानकर चले कि वे एक बार से अधिक मंत्रिपद पर नहीं रहेंगे. बीबीसी के वाशिंगटन संवाददाता का कहना है कि कॉलिन पॉवेल को एक उदारवादी नेता समझा जाता रहा है जिनकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और उनके प्रशासन से नहीं बनी. व्हाइट हाऊस के एक प्रवक्ता ने कहा है कि बुश प्रशासन के चारों वरिष्ठ मंत्री इस्तीफ़ा देंगे लेकिन उनकी जगह लेने वालों के नामों की घोषणा अभी नहीं की जाएगी. उदारवादी पॉवेल कॉलिन पॉवेल अमरीकी राष्ट्रपति बुश के पूरे कार्यकाल के दौरान विदेश मंत्री के पद पर रहे.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि कॉलिन पॉवेल को एक उदार और नरमपंथी नेता माना जाता है, वे हमेशा से सतर्कता और सबको साथ लेकर चलने की बात करने वाले व्यक्ति के रूप में देखे जाते हैं. अमरीकी सेना के जनरल रहे कॉलिन पॉवेल नरम रवैए और कथित तौर पर युद्ध का विरोध करने की वजह से अलग-थलग पड़ गए थे. यह भी कहा जा रहा था कि पॉवेल की रक्षा मंत्री डॉनल्ड रम्सफ़ेल्ड के साथ नहीं बन रही क्योंकि रम्सफ़ेल्ड को आक्रामक नेता के रूप में देखा जाता है. कॉलिन पॉवेल ने पहले भी कहा था कि वे दूसरे कार्यकाल के लिए तैयार नहीं हैं इसलिए उनके इस्तीफ़े को बहुत चौंकाने वाली ख़बर नहीं माना जा रहा है. इसराइली और फ़लस्तीनी अधिकारियों ने सोमवार को ही कहा था कि अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल अगले सप्ताह मध्य पूर्व का दौरा करने वाले हैं. फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात की मौत के बाद कॉलिन पॉवेल की इस यात्रा को काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा था, लेकिन अब ये तय नहीं है कि वे मध्य पूर्व का दौरा करेंगे या नहीं. बुश की क़रीबी राइस कोलिन पॉवेल के इस्तीफ़े की अटकलों के बीच कोंडोलीज़ा राइस को बहुत पहले से ही विदेश मंत्री के पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था. अब अमरीका की पहली अश्वेत महिला विदेश मंत्री बन कर वो इतिहास के पन्नों में अपना नाम लिखाने जा रही हैं. एक तरह से वे जॉर्ज बुश की स्वाभाविक पसंद ही हैं क्योंकि वे उनके सबसे क़रीबी सलाहकारों और विश्वासपात्रों में से हैं. कई विषयों पर वे बुश जैसी ही राय रखती हैं. अमरीकी विदेश मंत्रालय जो कॉलिन पॉवेल के रहते लगातार अलग थलग पड़ता जा रहा था, अब राइस के आने के बाद एक बार फिर मज़बूती के साथ प्रमुख भूमिका निभाने जा रहा है. वैसे तो बुश के दूसरे कार्यकाल में अमरीकी विदेश नीति के मध्यपूर्व पर केन्द्रित रहने की संभावना है लेकिन राइस रूस मामलों की जानकार हैं. इससे संकेत मिलता है कि जो नीति रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने राजनीतिक और नागरिक अधिकारों को लेकर अपनाई है उस पर भी राइस का अनुभव काम आ सकता है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||