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फ़्लोरिडा में नए मत-पत्र भेजे गए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के फ़्लोरिडा राज्य से हज़ारों डाक मतपत्र ग़ायब होने की ख़बरों के बाद अब नए सिरे से क़रीब 58 हज़ार मत-पत्र रवाना किए गए रहे हैं. ये मत-पत्र उन मतदाताओं को भेजे गए हैं जिन्हें डाक के ज़रिए ये मत-पत्र नहीं मिल सके और उनके बारे में कहा गया था कि वे ग़ायब हो गए थे. इस कारण से चुनाव में अनियमितताओं को लेकर नए सिरे से चिंता जताई गई है. इसी महीने मियामी के उत्तर में स्थित ब्रोवॉर्ड काउंटी के अधिकारियों ने 60 हज़ार मतपत्र ऐसे लोगों के लिए भेजे थे तो मतदान के लिए वहाँ मौजूद नहीं रहते. लेकिन इनमें से दो हज़ार मतपत्र ही संबंधित लोगों तक पहुँचाए गए. वर्ष 2000 में फ़्लोरिडा ही चुनाव विवादों के केंद्र में था जिसके कारण चुनाव नतीजों में देरी हुई और आख़िरकार जॉर्ज बुश को विजयी घोषित किया गया था. निर्वाचन अधिकारियों को बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के फ़ोन पर संदेश मिल रहे हैं जिन तक मतपत्र नहीं पहुँच पाए हैं. ऐसे लोगों का इस बात की चिंता सता रही है कि शायद वे राष्ट्रपति चुनाव में मत डाल ही नहीं पाएँ. वॉशिंगटन स्थित बीबीसी संवाददाता जस्टिन वेब का कहना है कि ग़ायब हुए मतपत्रों के कारण फ़्लोरिडा में अटकलों का बाज़ार गर्म है. वैसे भी इस राज्य में डेमोक्रेटिक पार्टी ने नौ अलग-अलग मुक़मदे पहले ही दर्ज किए हैं. अगर फ़्लोरिडा में टक्कर कड़ी रही और यहीं से देश के राष्ट्रपति का निर्वाचन तय हुआ, तो यह तय है कि एक बार फिर इसे लेकर क़ानूनी जंग छिड़ सकती है. ग़ायब हुए मतपत्रों को लेकर पुलिस जाँच से किसी आपराधिक साज़िश का संकेत नहीं मिला है. मुश्किल इस बीच अमरीका में डाक सेवा के निरीक्षकों का कहना है कि यह एकदम मुश्किल लगता है कि एक साथ 58 हज़ार मतपत्र ग़ायब हो जाएँ. डाक सेवा के एक प्रवक्ता ने बताया कि निरीक्षक यह भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि इतने मतपत्र भेजे भी गए थे या नहीं. ब्रोवॉर्ड काउंटी के निर्वाचन अधिकारी गिसेला सलास ने कहा, "स्थिति हमारे नियंत्रण के बाहर है. हमें वास्तव में इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि क्या हो रहा है." चुनाव प्रचार में जुटे लोग इस बात के लिए भी जी-जान से जुटे हैं कि ग़ायब हुए मतपत्रों के कारण कोई व्यक्ति अपना वोट न गँवाए. डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने निर्वाचन अधिकारियों से अपील की है कि वे स्थानीय अख़बारों में विज्ञापन देकर लोगों को बताएँ कि उनके मतदान के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है. उन्होंने रिपब्लिकन वर्चस्व वाली राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह चालाकी कर रही है. वर्ष 2000 में ब्रोवॉर्ड से डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार अल गोर को सबसे ज़्यादा मत मिले थे. वे यहाँ 67 प्रतिशत मतों से जीते थे हालाँकि फ़्लोरिडा से उन्हें हार का ही सामना करना पड़ा. फ़्लोरिडा डेमोक्रेटिक पार्टी की उपाध्यक्ष डायने ग्लेसर ने कहा, "ऐसा लग रहा है कि वे एक बार फिर हमारे मतों को चुराने की कोशिश कर रहे हैं." कई राज्यों में पहले से ही दोनों पार्टियाँ चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई मुक़दमों में उलझी हुई हैं. |
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