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इराक़ पर हमले के बाद एक लाख मौतें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रसिद्ध शोध पत्रिका 'लैंसेट' में प्रकाशित एक सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि ठोस योजना की कमी, गठबंधन सेनाओं के हवाई हमलों और हिंसा के वातावरण की वजह से ये मौते हुई हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ में आम लोगों के लिए हिंसा के ज़रिए मौत का ख़तरा अमरीकी गठबंधन के हमले से पहले की तुलना में कुल मिलाकर 58 गुना ज़्यादा बढ़ा है. रिपोर्ट में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन की योजना को बहुत ख़ामियों वाला बताते हुए उसकी निंदा की गई है. अलबत्ता शोधकर्ता यह स्वीकार करते हैं कि यह निष्कर्ष क़रीब एक हज़ार घरों में किए गए छोटे सर्वेक्षण पर आधारित हैं लेकिन साथ ही यह भी कहा गया है कि ये नतीजे मानने लायक़ नज़र आते हैं. शोध और नतीजे अमरीकी शहर बाल्टीमोर के जॉन्स हॉपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ़ पब्लिक हैल्थ के वैज्ञानिकों ने इराक़ के विभिन्न हिस्सों में जनवरी 2002 के बाद से हुए जन्म और मौतों के आँकड़े इकट्ठे किए. ये आँकड़े 33 समूहों में इकट्ठे किए गए और हर एक समूह में 30 गाँव रखे गए. सर्वेक्षण में बग़दाद, बसरा, अरबील, नजफ़ और करबला के साथ-साथ फ़लूजा से नमूने लिए गए. वैज्ञानिकों ने पाया कि इराक़ में 2003 में हमला होने के बाद से एक आम आदमी के लिए हिंसा से मौत का ख़तरा उससे पहले के 15 महीनों की तुलना में डेढ़ गुना बढ़ा है. अगर इनमें फ़लूजा के आँकड़े भी जोड़ लिए जाएं तो यह ख़तरा ढाई गुना बढ़ जाता है. ग़ौरतलब है कि फ़लूजा में अक्सर हिंसा होती रहती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि हमले से पहले ज़्यादातर मौतें दिल का दौरा पड़ने से और कुछ अन्य बीमारियों से होती थीं जबकि हमला होने के बाद बहुत सी मौतों की प्रमुख वजह हिंसा थी. रिपोर्ट कहती है कि हिंसा से होने वाली ज़्यादातर मौतों के लिए गठबंधन सेनाओं को ज़िम्मेदार बताया गया और ये मौतें ज़्यादातर महिलाओं और बच्चों की हुई हैं. इस शोध का नेतृत्व करने वाले वैज्ञानिक डॉक्टर लैस रॉबर्ट्स कहते हैं, "नपातुला अनुमान लगाने पर हम समझते हैं कि 2003 में इराक़ पर हमला होने के बाद से एक लाख या उससे ज़्यादा अतिरिक्त मौतें हुई हैं." उनका कहना है, "ज़्यादातर अतिरिक्त मौतों के लिए हिंसा ज़िम्मेदर थी और गठबंधन सेनाओं की तरफ़ से होने वाले हवाई हमलों की वजह से ही ज़्यादा हिंसक मौतें हुईं." डॉक्टर रॉबर्ट्स ने कहा कि उनकी टीम को यह अनुभव हुआ है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के बारे में आँकड़े इकट्ठा करना संभव है, यहाँ तक कि बहुत हिंसा वाले समय में भी. लैंसेट के संपादक रिचर्ड हॉर्टन का कहना था, "लोकतांत्रिक उपनिवेशवाद की वजह से कम नहीं बल्कि ज़्यादा मौतें हुई हैं. इस राजनीतिक और सैनिक विफलता की वजह से असैनिक लोगों की लगातार मौतें हो रही हैं." उन्होंने गठबंधन सेनाओं से अनुरोध किया कि वे अपनी रणनीति पर फिर से विचार करें ताकि ग़ैरज़रूरी मौतों को रोका जा सके. |
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