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इराक़ से 350 टन विस्फोटक ग़ायब | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इराक़ में सद्दाम हुसैन के शासनकाल के एक सैनिक परिसर से क़रीब 350 टन विस्फोटक ग़ायब हो गए हैं. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) का कहना है कि ये विस्फोटक राजधानी बग़दाद के निकट अल क़क़ा सैनिक केंद्र से हमले से बाद ग़ायब हुए हैं. आईएईए का कहना है कि संगठन इन विस्फोटकों के ग़ायब होने को लेकर काफ़ी चिंतित है क्योंकि इन सामग्रियों का इस्तेमाल पारंपरिक हथियारों के निर्माण और परमाणु हथियारों का विस्फोट करने में भी हो सकता है. अल-क़क़ा नाम के इस सैनिक ठिकाने पर अमरीकी नियंत्रण है मगर यहाँ एक के बाद एक कई बार लूट-पाट हुई है. बताया जा रहा है कि अमरीकी नेतृत्व वाली फ़ौजों को 10 दिन पहले इस बारे में सूचना दी गई थी मगर वे कोई भी विस्फोटक बरामद करने में विफल रहे हैं. चिंता परमाणु ऊर्जा एजेंसी को इस बात की कोई पुख़्ता सूचना नहीं मिली है कि किन हालात में ये विस्फोटक ग़ायब हुए. एजेंसी की प्रवक्ता मेलिसा फ़्लेमिंग का कहना है कि उन्हें उतनी ही सूचना मिली है जितनी इराक़ी सरकार ने उन्हें दी है. उन्होंने कहा, "हमें अभी तो यही पता है जो हमें इराक़ी सरकार ने बताया है और उनका कहना है कि युद्ध के बाद हुई लूटपाट में ये सब चीज़ें ग़ायब हुई हैं. इसलिए हमें निश्चित रूप से कुछ नहीं पता है कि ये विस्फोटक ग़ायब कब हुए या कैसे हुए और सबसे अहम ये है कि हमें ये भी नहीं पता है कि ये गए कहाँ." अब तो ये डर जताया जा रहा है कि वे विस्फोटक इराक़ी चरमपंथी गुटों के हाथों में गए हों. उधर बग़दाद स्थित ऑस्ट्रेलियाई दूतावास के पास सड़क के किनारे लगाए गए एक बम में विस्फोट हो जाने से वहाँ खड़े तीन इराक़ी नागरिकों के मारे जाने की सूचना है. इसमें आठ अन्य लोग भी घायल हुए हैं, जिनमें तीन ऑस्ट्रेलियाई सैनिक हैं. इराक़ में 900 से भी अधिक ऑस्ट्रेलियाई सैनिक हैं. मगर ये पहली बार है जबकि विद्रोहियों ने इन लोगों को निशाना बनाया है. |
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