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बर्मा और भारत के बीच तीन समझौते | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बर्मा की सैन्य सरकार के प्रमुख जनरल थान श्वे ने भारत की अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की है. दोनों पक्षों ने सुरक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पनबिजली के तीन समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए. यह पिछले पच्चीस वर्ष में बर्मा के किसी भी राष्ट्राध्यक्ष की पहली भारत यात्रा है. यात्रा का भारत में लोकतंत्र-समर्थक बर्मी गुटों ने विरोध किया है और उनका कहना है कि यह सैन्य तानाशाही को बढ़ावे का संकेत देती है.
जनरल थान अपने आठ मंत्रियों के साथ छह दिन की यात्रा पर भारत आए हैं. इससे पहले सोमवार को राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक रूप से स्वागत किया गया जहाँ राष्ट्रपति अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उनकी अगवानी के लिए मौजूद थे. इस सप्ताह के शुरु में बर्मा के प्रधानमंत्री थिन न्यून्त को हटाकर उनकी जगह लेफ़्टिनेंट जनरल सो विन को नियुक्त कर दिया गया था. लेकिन इसके बावजूद थान श्वे ने अपने भारत आने के कार्यक्रम में बदलाव नहीं किया. बीबीसी के संवाददाता सुबीर भौमिक का कहना है कि थान श्वे की भारत यात्रा महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह संकेत मिल सकता है कि बर्मा के सैनिक शासन को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का समर्थन हासिल है. |
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