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गुरुवार, 07 अक्तूबर, 2004 को 13:07 GMT तक के समाचार
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इराक़ सर्वे ग्रुप रिपोर्ट पर प्रतिक्रियाएँ
सद्दाम हुसैन
बुश और ब्लेयर का कहना है कि सद्दाम के हटने से दुनिया ज़्यादा सुरक्षित हुई है
अमरीका के इराक़ सर्वे ग्रुप ने कहा है कि जब इराक़ पर अमरीका के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हमला किया था तो उस समय राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के पास महाविनाश के कोई हथियार नहीं थे.

इराक़ सर्वे ग्रुप की रिपोर्ट के बाद इराक़ पर हमले के मुद्दे पर बहस और गहरी हो गई है और इस पर विश्व नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ व्यक्त की है.

हांस ब्लिक्स, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व मुख्य हथियार इंसपेक्टर

"अगर हमें हमला शुरू होने से पहले जाँच-पड़ताल करने के लिए कुछ और महीने का समय मिल जाता तो अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए और अन्य लोगों को यह बताने के क़ाबिल होते कि उनमें से किसी भी स्थान पर महाविनाश के कोई हथियार नहीं थे जो स्थान हमें बताए गए थे."

बरहाम सालेह, इराक़ी उपप्रधानमंत्री

"हम जानते हैं कि सद्दाम हुसैन के पास महाविनाश के हथियार थे. हम यह भी जानते हैं कि सद्दाम हुसैन ने महाविनाश के हथियारों का प्रयोग किया था. जिन्हें इस बारे में सबूत चाहिएँ वे हलाब्जा जाकर वहाँ की क़ब्रगाह देखें."

 इस बात का वास्तविक ख़तरा था कि सद्दाम हुसैन महाविनाश के हथियार, सामग्री और जानकारी आतंकवादी संगठनों को दे सकते थे.
जॉर्ज बुश

"सद्दाम हुसैन जिन इरादों के साथ सत्ता में बने हुए थे और उनके पास जो तकनीकी क्षमताएँ थीं और तेल के बदले भोजन कार्यक्रम में जिस तरह से वे धन बचा रहे थे उससे हमारे दिमाग़ में इस बारे में कोई शक नहीं है कि सद्दाम हुसैन इन हथियारों को कारगर बनाने में बहुत ज़्यादा वक़्त नहीं लेते और फिर इराक़ी लोगों के लिए भारी ख़तरा पैदा हो जाता."

जॉर्ज डब्ल्यू बुश, अमरीका के राष्ट्रपति

"इस बात का वास्तविक ख़तरा था कि सद्दाम हुसैन महाविनाश के हथियार, सामग्री और जानकारी आतंकवादी संगठनों को दे सकते थे."

"11 सितंबर 2002 के बाद हम इस तरह का ख़तरा नहीं उठा सकते थे. सद्दाम हुसैन को जेल में बिठाने के बाद दुनिया ज़्यादा सुरक्षित हुई है."

टोनी ब्लेयर, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री

"मैं यह क़बूल कर चुका हूँ कि इराक़ में तैनाती के लिए तैयार महाविनाश के हथियारों का कोई ज़ख़ीरा नहीं मिला है. मैं उम्मीद करता हूँ कि अन्य लोग भी यह स्वीकार करने में ईमानदारी दिखाएंगे कि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इराक़ पर लगे प्रतिबंधों का असर नहीं हो रहा था."

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 संक्षिप्त में, बात ये है कि हमने एक देश पर हमला किया जहाँ हज़ारों लोग मारे गए, और इराक़ कभी भी गंभीर या बढ़ता ख़तरा नहीं था.
जॉन रॉकफ़ेलर, डेमोक्रेट सीनेटर

"इसके उलट सद्दाम हुसैन उन प्रतिबंधों को बेअसर साबित करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे थे और महाविनाश के हथियारों और कार्यक्रम को फिर से विकसित करने की कोशिश कर रहे थे. दरअसल संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को मानने की उनकी मंशा कभी नहीं रही."

जैक स्ट्रॉ, ब्रितानी विदेशमंत्री

"इराक़ सर्वे ग्रुप की रिपोर्ट के आधार पर यह स्वीकार करना होगा कि सद्दाम हुसैन न सिर्फ़ महाविनाश के हथियार विकसित करने की क्षमता और इरादा रखते थे बल्कि उन्हें रोकने की नीतियाँ भी कारगर साबित नहीं हो रही थीं."

"प्रतिबंध बेअसर साबित हो रहे थे और अब सद्दाम हुसैन के सत्ता से हट जाने के बाद दुनिया ज़्यादा सुरक्षित हुई है."

जॉन रॉकफ़ेलर, अमरीकी सीनेट की ख़ुफ़िया और विदेश मामलों की समिति के डेमोक्रेटिक सदस्य

"सद्दाम हुसैन की इच्छाओं और इरादों पर सारा ध्यान देने के बावजूद ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं कि हमले के वक़्त उनके पास हथियारों का कोई ज़ख़ीरा था या उन्हें बनाने की कोई क्षमता थी. संक्षिप्त में, बात ये है कि हमने एक देश पर हमला किया जहाँ हज़ारों लोग मारे गए, और इराक़ कभी भी गंभीर या बढ़ता ख़तरा नहीं था."

जॉन हॉवर्ड, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री

"अब सबसे बड़ी चुनौती ये है कि इराक़ एक लोकतांत्रिक देश बन जाए. मैं नहीं समझता कि रिपोर्ट में कोई बदली हुई बात नज़र आई है. मैं सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाने वाले अभियान में शामिल रहने के लिए बिल्कुल भी क्षमा प्रार्थी नहीं हूँ."

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