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समारा में 109 विद्रोही मारे गए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी सैनिक अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने इराक़ की राजधानी बग़दाद के उत्तर में स्थित शहर समारा में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 109 विद्रोहियों को मार डाला है. अमरीकी और इराक़ी सैनिकों ने शहर की सरकारी इमारतों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है. इराक़ पर पिछले साल हुए हमले के बाद अमरीकी सैनिकों की यह सबसे बड़ी सैनिक कार्रवाइयों में से एक थी. इस कार्रवाई में अमरीकी टैंकों का साथ लड़ाकू विमानों ने भी दिया. साथ में क़रीब एक हज़ार इराक़ी सुरक्षा बल के जवान भी थे. अमरीका का कहना है कि सैनिक कार्रवाई में निशाना दो हज़ार से ज़्यादा विद्रोही थे जिन्होंने देशभर में हमलों के लिए समारा को अपना ठिकाना बना रखा है. समारा के अस्पताल में डॉक्टरों का कहना है कि वहाँ दवाइयाँ ख़त्म हो रही हैं. कुछ महीने पहले फ़लूजा में अमरीकी सेनाओं और विद्रोहियों के बीच सुलह कराने वाले इराक़ी इस्लामी पार्टी के नेता अला मेकी का कहना है कि समारा में अब भी हिंसा जारी है और लोग बहुत चिंतित हैं. "कई पक्ष समस्या को हल करने की कोशिश कर रहे हैं. हम अमरीकियों और इराक़ी सुरक्षा बलों के साथ बातचीत कर रहे हैं. दूसरी तरफ़ स्थानीय लोगों के साथ भी संपर्क में हैं." अल मेकी का कहना था, "हम जानते हैं कि समारा में सारे लोग हिंसा का समर्थन नहीं करते, लेकिन कुछ लोग हैं जिन्हें हम नाम से भी जानते हैं, हम उनके रिश्तेदारों से भी बात कर रहे हैं कि वे समारा छोड़ कर चले जाएं और इस तरह की कार्रवाइयाँ बंद कर दें." अफ़रा-तफ़री एक समझौते के तहत इस शहर में अमरीकी सेना की गश्त सीमित थी. कल की कार्रवाई में लोगों को अपने सामान के साथ शहर से बाहर जाने के लिए क़तारों में देखा गया. स्थानीय लोग अमरीकी और इलाक़ी सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई से ख़ासे नज़र आए. एक स्थानीय व्यक्ति का कहना था, "लोग यहाँ आ रहे थे और उन्हें गोलियों से भूना जा रहा था. क़रीब बीस तो देखते ही देखते मारे गए." "अमरीकी और इराक़ी सुरक्षा बल लोगों को प्रताड़ित करने और आम लोगों, महिलाओं और बच्चों को गिरफ़्तार करने, और इमारतों को ध्वस्त करने के लिए समारा में आए हैं." लेकिन इराक़ के आंतरिक सुरक्षा मामलों के राज्यमंत्री क़ासिम दाऊद का कहना है कि समारा के लोग चाहते हैं कि वहाँ से विद्रोही चले जाएँ. उन्होंने स्थानीय लोगों को भरोसा दिलाया कि जल्दी ही इलाक़े को विद्रोहियों के प्रभाव से मुक्त करा लिया जाएगा. मगर मंत्री के इस भरोसे से लोगों का ग़ुस्सा शांत होता नहीं नज़र आया. अमरीकी और इराक़ी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए लोगों के रिश्तेदार क़ब्रों से लौटकर अपने ग़ुस्से को रोक नहीं पाए. अपने भाई को दफ़नाने के बाद लौटे एक ऐसे ही रिश्तेदार का कहना था, "सद्दाम हुसैन के शासन में भी ऐसा नहीं हुआ. यहाँ जो कुछ भी हो रहा है बिल्कुल हैरान करने वाला है. हमें ऐसी आज़ादी क़तई नहीं चाहिए जिसमें इतने बच्चों की जान गँवानी पड़े." उधर अस्पताल में डॉक्टर भी इस हिंसा से विचलित नज़र आए. एक डॉक्टर का कहना था कि यह बहुत ख़ूनख़राबे वाला दिन था. "बहुत से बच्चों ने अस्पताल पहुँचते ही दम तोड़ दिया. तीन बच्चे तो एक ही परिवार से थे. और यह सोचकर रूह काँप जाती है कि हम उन्हें बचा नहीं सके. मुझे ग़ुस्सा इसलिए आ रहा है कि ये बच्चे तो मासूम थे, वे आतंकवादी नहीं थे, उन्हें तो कुछ भी पता नहीं था, फिर उन्हें क्यों निशाना बनाया गया." अमरीकी सेना ने कहा है कि समारा पर अब उनका नियंत्रण है और इराक़ी सरकार भी कहती है कि समारा से जल्दी ही विद्रोहियों को बाहर निकाल दिया जाएगा. उधर शहर में बिजली और पानी की क़िल्लत हो रही है और सड़कों पर कुछ शव लावारिस हालत में भी पड़े देखे गए. |
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