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इराक़ से सेना वापसी का प्रस्ताव नामंज़ूर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर को उनकी लेबर पार्टी के सम्मेलन में इराक़ मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण जीत हासिल हुई है. ब्राइटन शहर में पार्टी के वार्षिक सम्मेलन में इराक़ से ब्रितानी सेना को निकालने का प्रस्ताव भारी अंतर से अस्वीकार हो गया है. प्रस्ताव के विरोध में 86 प्रतिशत, जबकि समर्थन में मात्र 14 प्रतिशत मत पड़े. उल्लेखनीय है कि सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के भीतर इराक़ मुद्दे पर काफ़ी खींचतान रहती है और पार्टी नेतृत्व ने इससे पहले कई मौक़ों पर इस मुद्दे पर चर्चा से बचने की कोशिश की. मतदान में ब्लेयर की जीत पहले से ही पक्की मानी जा रही थी क्योंकि श्रमिक संघों ने इस मुद्दे सरकार के पक्ष में वोट डालने का फ़ैसला कर लिया था. इराक़ से ब्रितानी सेना को निकालने के प्रस्ताव पर मतदान से पहले बहस के दौरान विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने कहा है कि इस समय सेना निकालने से इराक़ के पुनर्निर्माण पर दुष्प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने कहा, "इराक़ में स्थिति गंभीर है. हमें इस बात को याद रखना चाहिए कि इराक़ी जनता और सरकार जिस एजेंडे पर चलना चाहती है वह उन्होंने ख़ुद तय किया है और उस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहमति मिली हुई है." स्ट्रॉ ने कहा कि यदि इराक़ की निर्वाचित सरकार अमरीका की अगुआई वाले गठजोड़ बलों को देश से जाने के लिए कहती है तो सेना वापस बुलाई जा सकती है. |
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