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अलावी और ब्लेयर ने समर्थन माँगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन और इराक़ के प्रधानमंत्रियों ने इराक़ में विद्रोह का सामना करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन की अपील की है. ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने चेतावनी दी कि इराक़ में हो रहे संघर्ष से ही 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद' का भविष्य तय होगा. ब्लेयर से लंदन में मुलाक़ात के बाद इराक़ी प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इराक़ में जनवरी में चुनाव संभव कराने के लिए संयुक्त राष्ट्र हरसंभव क़दम उठाए. अब जबकि इराक़ में अमरीकी गठबंधन वाली सेनाओं के सामने चुनौतियाँ लगातार बढ़ ही रही हैं ऐसे में और अंतरराष्ट्रीय समर्थन लेना मुश्किल साबित हो सकता है. एक समय था जबकि इराक़ में कुल 32 देश और उनके सैनिक गठबंधन वाली सेनाओं में शामिल थे मगर उसके बाद से अब कुछ देश वापस हो रहे हैं. स्पेन में वाम झुकाव की सरकार आने के बाद से इराक़ ने समर्थन वापस लिया है. इसके बाद जैसे-जैसे इराक़ में विभिन्न देशों के लोगों के अपहरण की घटनाएँ बढ़ रही हैं वैसे-वैसे देश अब कतराने लगे हैं. फ़िलीपीन्स के एक नागरिक को जान से मारने की जब धमकी दी गई तो फ़िलीपीन्स ने भी अपनी सेना वापस बुला ली. इसी तरह जब इटली के कुछ लोग इराक़ में बंधक बनाए गए तो वहाँ के लोगों ने भी विरोध प्रदर्शन करते हुए माँग की कि उनका देश इराक़ से सेना वापस बुला ले. फ़्रांस और जर्मनी जैसे देश तो शुरू से ही इराक़ में युद्ध के विरुद्ध रहे हैं. मगर अलावी ने अपील ख़ासतौर पर संयुक्त राष्ट्र से की है. इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय पर पिछले साल अगस्त में हमला हुआ था, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के दूत सर्गियो डि मेलो की हत्या हो गई थी. अब इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के कुछ ही लोग रह गए हैं. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान अपने कर्मचारियों को और ख़तरों के सुपुर्द करना नहीं चाहते हैं. |
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