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अमरीका ने अन्नान के बयान को नकारा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान के इस वक्तव्य को ख़ारिज कर दिया है कि इराक़ पर अमरीका की अगुआई में किया गया हमला ग़ैर-क़ानूनी था. अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता रिचर्ड बाउचर ने गुरूवार को कहा कि इराक़ पर बल प्रयोग के लिए समुचित क़ानूनी आधार थे. बाउचर ने कहा कि इराक़ पर हमला संयुक्त राष्ट्र के उन प्रस्तावों के अनुरूप था जिनमें कहा गया था कि अगर इराक़ संयुक्त राष्ट्र की बातें नहीं मानता है तो उसके "गंभीर परिणाम" होंगे. इससे पहले अमरीकी के तीन सहयोगी देश ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और पोलैंड भी कह चुके हैं कि इराक़ पर हमला अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत सही था. ब्रिटेन सरकार ने कहा कि उनके अपने एटॉर्नी जनरल ने हमले के समय ये पता लगाया था कि इराक़ पर हमला करने का क़ानूनी आधार बनता है. अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, "एटॉर्नी जनरल ने हमले के समय क़ानूनी आधार पर सरकार की स्थिति स्पष्ट कर दी थी." ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड ने भी कहा है कि इराक़ पर जो हमला हुआ वह पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के दायरे में आता है. जॉन हॉवर्ड ने संयुक्त राष्ट्र पर ही निशाना साधते हुए कहा कि कई बार ऐसा होता है कि संयुक्त राष्ट्र अपने सदस्यों के बीच सहमति बना पाने में नाकाम रहता है. उधर इराक़ी अंतरिम सरकार ने कहा है कि सद्दाम हुसैन के शासन का ख़ात्मा देखकर इराक़ के लोग ख़ुश हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने बीबीसी के साथ एक इंटरव्यू में कहा था कि पिछले साल अमरीका के नेतृत्व में इराक़ पर किया गया हमला ग़ैर-क़ानूनी था. अन्नान ने यह भी कहा कि इराक़ में जो मौजूदा हालात हैं उनसे जनवरी में प्रस्तावित चुनावों पर असर पड़ सकता है. अन्नान का बयान कोफ़ी अन्नान ने कहा कि इराक़ पर किया गया हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन था. यह पूछे जाने पर कि क्या इराक़ पर किया गया हमला अवैध था, उन्होंने कहा, "हाँ था, अगर आप चाहते हैं. मैंने इसके पहले ये संकेत दिया था कि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के हिसाब से ये सही नहीं था, उस हिसाब से ये ग़ैर-क़ानूनी था." उन्होंने कहा कि इराक़ युद्ध से कई दर्दनाक सबक सीखने को मिले हैं. उन्होंने कहा, "मैं समझता हूँ कि अंत में सबने यही फ़ैसला किया कि हमें अपने सहयोगियों के साथ मिलकर और संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से काम करना चाहिए." उन्होंने ये भी कहा कि इराक़ में अगर स्थिति आज जैसी है वैसी ही बनी रही तो वहाँ विश्वसनीय तरीक़े से चुनाव नहीं हो सकते. |
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