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अनवर इब्राहिम रिहा किए गए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मलेशिया के सर्वोच्च न्यायालय ने जेल में बंद पूर्व उपप्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के विरुद्ध समलैंगिकता का मामला ख़ारिज कर दिया है. छह वर्ष पहले मलेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद ने एक नाटकीय घटनाक्रम में इब्राहिम को पद से बर्ख़ास्त कर दिया था. उन्हें 1999 में जेल में बंद कर दिया गया था और सज़ा के विरुद्ध उनकी पहले की याजिका ख़ारिज कर दी गई थी. अब रिहाई के बाद वे पीठ में लगी चोट का इलाज करवाने जर्मनी जाएँगे. उनका कहना है कि गिरफ़्तारी के समय उन्हें चोट लगी थी. अनवर का कहना है कि जब उन्हें सबसे पहले 1998 में गिरफ़्तार किया गया था तब देश के तत्कालीन पुलिस प्रमुख ने उन्हें मारा था. उनके वकील पवनचीक मारिकान ने फ़ैसले के बाद कहा, "वह अब जाने के लिए स्वतंत्र हैं. इसमें अब कोई शक नहीं रह गया है." अनवर को 1999 में भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में डाल दिया गया था और इसे राजनीति से प्रेरित माना गया था. माना जाता है कि देश की अर्थव्यवस्था कैसे चलाई जाए इस बारे में तत्कालीन प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद से मतभेद के बाद इब्राहिम को ये सज़ा दी गई थी. समलैंगिकता के आरोप इसके बाद वर्ष 2000 में उन्हें अपने ड्राइवर के साथ शारीरिक संबंध बनाने के मामले में नौ वर्ष की सज़ा हुई थी. मलेशिया के क़ानून के मुताबिक़ समलैंगिकता दंडनीय अपराध है. सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा कि पूर्व उप प्रधानमंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोप सही और विश्वसनीय नहीं हैं, उन्हें काफ़ी पहले ही दोषमुक्त कर दिया जाना चाहिए था लेकिन "उच्च न्यायालय से फ़ैसला करने में ग़लती हुई." राजधानी कुआलालंपुर में मौजूद बीबीसी संवाददाता जॉनाथन केंट के अनुसार इब्राहिम की गिरफ़्तारी की वजह से देश की अब्दुल्ला बदावी की मौजूदा सरकार के सामने काफ़ी दिक़्क़तें आ रही थीं. |
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