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फ़्रांसीसी विदेश मंत्री इराक़ रवाना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़्रांस के राष्ट्रपति ज्याक़ शिराक़ ने विदेश मंत्री एम बार्निए को इराक़ भेजा है ताकि वे बंधक बनाए गए दो फ़्रांसीसी पत्रकारों को रिहा करवाने में मदद कर सकें. वे वहाँ पर पत्रकारों को रिहा करवाने के लिए हो रही कोशिशों का नेतृत्व करेंगे. अपहर्ताओं ने फ़्रांस की सरकार को सोमवार तक का समय दिया है और माँग की है कि मुस्लिम लड़कियों के हिजाब पहनने पर अगले महीने से लागू होने वाले प्रतिबंध को वापस लिया जाए. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि फ़्रांसीसी परेशान हैं कि इराक़ युद्ध का विरोध करने के बावजूद फ़्रांस के नागरिकों को निशाना बनाया गया है. उनका ये भी कहना है कि फ़्रांस की सरकार के हिजाब पहनने पर लगे प्रतिबंध को हटाने की संभावना कम है. फ़्रांस में चिंता फ़्रांस के ये दोनों पत्रकार इस महीने के आरंभ में इराक़ में लापता हो गए थे. इससे पहले फ़्रांस में प्रधानमंत्री ज़ां पिए राफ़रां ने अपने सहयोगियों की एक आपात बैठक बुलाई जिसमें इराक़ में दो फ़्रांसीसी पत्रकारों के अपहरण पर विचार हुआ. अरबी टेलीविज़न चैनल अल जज़ीरा ने एक वीडियोटेप का प्रसारण किया है जिसमें दो लोगों को दिखाया गया है और कहा गया है कि वे दोनों फ़्रांस के पत्रकार हैं. दोनों लोग एक बैनर के आगे खड़े हैं जिसपर 'इस्लामिक आर्मी इन इराक़' लिखा हुआ है. टेलीविज़न पर बताया गया कि ये गुट फ़्रांस में सरकारी स्कूलों में मुस्लिम लड़कियों के हिजाब और अन्य धार्मिक प्रतीकों के पहनने पर लगी पाबंदी को हटाने की माँग कर रहा है. फ़्रांस के गृहमंत्री डोमिनिक द विलेपां ने मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात की है. मुलाक़ात के बाद विलेपां ने कहा कि अब समय आ गया है कि देश एकजुट हो जाए. फ़्रांस के प्रमुख मुस्लिम संगठन ने फ़्रांसीसी पत्रकारों के अपहरण को 'ब्लैकमेल' करने का एक निंदनीय क़दम बताया है. |
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