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मज़ार पर नियंत्रण सद्र समर्थकों का ही | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ी सरकार के दावों के विपरीत नजफ़ में हज़रत अली के मज़ार के परिसर पर अभी भी शिया नेता मुक़्तदा अल सद्र के समर्थकों का ही नियंत्रण है. पहले सरकार ने दावा किया था कि परिसर पर इराक़ी सुरक्षा बलों का कब्ज़ा हो गया है. लेकिन मज़ार परिसर को अमरीकी टैंकों ने घेर रखा है और सैनिक सँकरी गलियों में गश्त लगा रहे हैं. इस परिसर के भीतर से बीबीसी के संवाददाता ने ख़बर दी है कि वहाँ कोई एक हज़ार लोग हैं और उनमें से कई लोग मुक़्तदा अल सद्र की तस्वीरों वाले बैनर लिए हुए हैं. लोगों का कहना है कि वे पवित्र मज़ार की सुरक्षा के लिए वहाँ हैं. संवाददाता का कहना है कि मज़ार को कोई ब़डा नुक़सान नहीं पहुँचा है और वहाँ कोई हथियार नहीं है. लेकिन परिसर तक आने वाली सँकरी गलियों में सद्र के समर्थक हैं और उनके पास भारी हथियार हैं. सरकार का रुख़ नजफ़ की स्थिति पर सरकार भी उतने ही भ्रम में दिखाई देती है जितना कि पूरा देश दिखाई दे रहा है हालांकि यह इराक़ पर अंतरिम सरकार की पकड़ का पहला परीक्षण है.
बीबीसी संवाददाता मैथ्यू प्राइस का कहना है कि पिछले 24 घंटों में अंतरिम प्रधानमंत्री इयाद अलावी की साख को धक्का पहुँचा है. सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय में अधिकारियों को यह नहीं पता कि अगला क़दम क्या होगा. सरकार को इस बात की चिंता है कि जितने लंबे समय तक मुक़्तदा अल सद्र का नजफ़ पर नियंत्रण रहेगा उतना ही देश के दूसरे इलाक़ों में विद्रोहियों का मनोबल बढ़ेगा. कई मारे गए गुरुवार की रात के बाद से अमरीकी विमानों ने नजफ़ पर कोई हमला नहीं किया है. उल्लेखनीय है कि अमरीकी विमानों ने गुरुवार की रात जो हमला किया था उसमें 70 इराक़ियों की मौत हुई थी. लेकिन दूसरी ओर इराक़ के दूसरे हिस्सों में विद्रोहियों के हमले में कई लोग मारे गए हैं. बग़दाद के दक्षिण में रामादि में अधिकारियों ने बताया कि एक पुलिस कर्नल को अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मार दी. बाक़ोबा में एक विस्फोट में दो नागरिकों की मौत हो गई. ये विस्फोट अमरीकी सेना के एक दल के वहाँ से गुज़रने के तत्काल बाद हुआ. |
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