|
शेरॉन को झटका: गठबंधन नामंज़ूर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की लिकुड पार्टी ने उनकी उस योजना को अस्वीकार कर दिया है जिसके तहत वे विपक्षी लेबर पार्टी के साथ गठबंधन चाहते थे. प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ये गठबंधन इसलिए चाहते थे क्योंकि वे गज़ा पट्टी से इसराइली बस्तियाँ हटाने की अपनी विवादास्पद योजना के लिए समर्थन जुटाना चाहते हैं. उन्होंने टेल अवीव में लिकुड पार्टी के सम्मेलन को बताया कि सत्ताधारी गठबंधन का विस्तार करने और गज़ा योजना को आगे बढ़ाने का कोई विकल्प नहीं है. गठबंधन की योजना ख़ारिज हो जाने के बाद प्रधानमंत्री शेरान का कहना था, "दरअसल लिकुड पार्टी में एक ऐसा गुट है जो शुरु से कुछ हद तक सरकार के ख़िलाफ़ काम करता रहा है. ये व्यक्तिगत तौर पर मुझे और सरकार को निशाना बनाता रहा है." उनका कहना था, "उस गुट ने ये भी कहा है कि वह संसद में भी सरकार के ख़िलाफ़ मतदान कर सकता है. इस तरह के बर्ताव से लिकुड पार्टी में विभाजन हो सकता है." बीबीसी संवाददाता का कहना है कि कई लोगों को लिकुड पार्टी में ऐसी गतिविधियाँ होने की संभावना नज़र आ रही थी और चुनाव जल्द हो सकते हैं. इससे पहले इसराइल में प्रधानमंत्री शेरॉन का मंत्रिमंडल उनकी ग़ज़ा सेना की वापसी की विवादित योजना को सिद्धांत तौर पर मंज़ूरी दे चुका है. लेकिन मंत्रिमंडल ने गज़ा से इसराइली बस्तियों को हटाने के बारे में फ़ैसला स्थगित कर दिया था. उस समय ये माना जा रहा था कि इससे प्रधानमंत्री शेरॉन सत्ताधारी गठबंधन में एकता बनाकर रख सकेंगे क्योंकि इसराइली बस्तियाँ हटाने का कोई ऐतिहासिक फ़ैसला नहीं लिया गया. लेकिन अब प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||