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'इराक़ में केवल मुस्लिम देशों की सेना' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सऊदी अरब ने इराक़ में एक ऐसी शांति सेना तैनात करने का सुझाव रखा है जिसमें केवल मुस्लिम देशों के सैनिक ही हों. इस सुझाव पर अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल, सऊदी अरब के अधिकारियों और इराक़ी अंतरिम प्रधानमंत्री ईयाद अलावी के बीच बातचीत हुई है. अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने सतर्कतापूर्ण प्रतिक्रिया देते हुए इसका स्वागत किया है और फ़िलहाल यही कहा है कि ये एक रोचक सुझाव है. सऊदी विदेश मंत्री सऊद अल-फ़ैसल ने इस बात की पुष्टि की है कि इस विषय में कुछ इस्लामी देशों से प्राथमिक बातचीत हुई है. लेकिन इस शांति सेना में इराक़ के पड़ोसी देशों को शामिल नहीं किया जाएगा. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि कई मुस्लिम देशों में जनता को इस बारे में मनाने में मुश्किल आ सकती है. इन देशों में इराक़ पर अमरीकी हमले के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुए थे. लेकिन बीबीसी संवाददाता का ये भी कहना है कि फ़िलहाल ऐसे कोई संकेत नहीं हैं कि अमरीका इराक़ में अपना प्रभाव घटाने पर विचार कर रहा है. ये बातचीत उस समय हो रही है जब अमरीका ने इराक़ में हाल में हुए आत्मघाती हमले की निंदा की है. बक़ूबा में बुधवार को हुए हमले में 70 लोग मारे गए थे और कई घायल हो गए थे. |
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