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शेरॉन की योजना के ख़िलाफ़ प्रदर्शन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्य पूर्व में गज़ा पट्टी में हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने इसराइली सरकार के गज़ा पट्टी से हटने के एकतरफ़ा फ़ैसला का विरोध किया है. गज़ा से येरुशलम तक 90 किलोमीटर के रास्ते में इसराइलियों ने हाथ से हाथ जोड़कर सरकारी नीति का विरोध किया. गज़ा पट्टी से सन 2005 में प्रस्तावित वापसी के ख़िलाफ़ ये सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन है. गज़ा में शमीर इत्ज़क ने ये विरोध शुरु किया और विरोध प्रदर्शन के दूसरे कोने में थीं उनकी छह वर्षीय पोती यैल बैटर जो येरुशलम की दीवार के पास खड़ी थीं. शमीर को गज़ा पट्टी से 1948 में बाहर निकाल दिया गया था जब मिस्र ने गज़ा पर कब्ज़ा किया था. प्रदर्शनकारियों ने देशभक्ति के गीत गए और नाच-गाना भी किया. पुलिस के अनुसार लगभग 70 हज़ार लोगों ने इस प्रदर्शन में भाग लिया लेकिन इसराइली टीवी ने प्रदर्शनकारियों की संख्या एक लाख तीस हज़ार बताई. गज़ा के 54 वर्षीय अब्राहम इत्ज़की ने कहा, "हम यहाँ यहूदियों को उनकी ज़मीन से निकाले जाने के कार्यक्रम के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं." योजना प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की योजना के मुताबिक गज़ा की 21 और पश्चिमी तट की चार यहूदी बस्तियों को अगले साल सितंबर तक खाली कर दिया जाएगा. इनमें सात हज़ार इसराइली 13 लाख फ़लस्तीनियों के बीच रहते हैं. ये इसलिए किया जा रहा है ताकि इसराइल को फ़लस्तीनी चरमपंथियों से सुरक्षित किया जा सके. प्रधानमंत्री शेरॉन की योजना का उनकी गठबंधन सरकार के कुछ सदस्यों समेत इसराइल के दक्षिणपंथी विरोध कर रहे हैं. सर्वेक्षणों से पता चला है कि अधिकतर इसराइली इस योजना के पक्ष में हैं. |
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