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इराक़ पर सीआईए की कड़ी आलोचना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी संसद की ख़ुफ़िया समिति ने इराक़ के कथित महाविनाश के हथियारों के सबूतों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के लिए सीआईए की कड़ी आलोचना की है. समिति की 511 पेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ पर हमले को न्यायोचित ठहराने के लिए अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी (सीआईए) ने जो सबूत जुटाए, उनकी गुणवत्ता की पूरी जाँच नहीं की गई. रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक़ युद्ध से पहले सीआईए ने जो सबूत इकट्ठे किए वो बहुत कम ख़ुफ़िया जानकारी और ख़राब विश्लेषण पर आधारित थे. समिति ने साफ़ कहा कि महाविनाश के हथियारों के बारे में बढ़ा चढ़ाकर बताया गया. ये पहले से तय मान लिया गया कि इराक़ के पास ये हथियार हैं और इस बात पर पर्याप्त ख़ुफ़िया जानकारी इकट्ठी नहीं की गई. दोष पूरी तरह सीआईए के तत्कालीन निदेशक जॉर्ज टेनेट का नाम लिया गया लेकिन साथ ही कहा गया है कि ख़ुफ़िया अधिकारियों पर कोई राजनीतिक दबाव नहीं था. सीनेट की ख़ुफ़िया समिति के प्रमुख पैट रॉबर्ट्स ने कहा कि सीआईए ने इराक़ मामले पर जो राय बनाई वो अतार्किक थी और उसके समर्थन में पर्याप्त सबूत भी नहीं थे. उन्होंने कहा कि सीआईए और अन्य ख़ुफ़िया एजेंसियाँ इस सामूहिक सोच की शिकार रहीं कि इराक़ के पास महाविनाश के हथियार हैं. दबाव नहीं रिपब्लिकन सीनेटर रॉबर्ट्स ने कहा कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि सीआईए ने इराक़ संबंधी अपनी रिपोर्ट के कुछ निष्कर्ष बुश प्रशासन के दबाव में लिखे थे. उन्होंने कहा, "समिति को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे लगता हो कि बुश प्रशासन के अधिकारियों ने इराक़ के महाविनाश के हथियारों संबंधी रिपोर्ट के निष्कर्षों को बदलने के लिए सीआईए पर किसी तरह का दबाव डाला या किसी और तरह से प्रभावित करने की कोशिश की." समिति के डेमोक्रेट सदस्य जे रॉकफ़ेलर ने कहा कि संसद ने इराक़ पर हमले की मंज़ूरी नहीं दी होती यदि उसे ये सब जानकारी रही होती, जो कि अब सामने आई है. |
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