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इसराइली सेना ने घर गिराने शुरू किए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइली सेना ने ग़ज़ा पट्टी के दक्षिणी छोर पर बने रफ़ा शरणार्थी शिविर में बसे फ़लस्तीनी घरों को गिराना शुरू कर दिया है. कम से कम दस घर गिराए जा चुके हैं और ख़बरें ऐसी आ रही हैं कि सरकार की योजना सैंकड़ों घरों को गिराने की है. यरूशलम में बीबीसी संवाददाता मैथ्यू प्राइस को इसराइली सूत्रों ने बताया कि इस योजना के पीछे उनकी मंशा गज़ा पट्टी के दक्षिण में अपने नियंत्रण वाले इलाकों को और बढ़ाने की है. फ़लस्तीनी अधिकारियों और संयुक्त राष्ट्र ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे विपदा की स्थिति करार दिया है. वहां मौजूद लोगों ने बताया कि लोग अपने अपने घरों को छोड़कर भाग रहे हैं. बुधवार को फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने एक इसराइली सैनिक वाहन को उड़ा दिया था जिसमें पाँच इसराइली सैनिक मारे गए थे. उसके बाद से इसराइली सैनिकों ने इस इलाके पर अपनी पकड़ मज़बूत करने के लिए इस मुहिम की शुरुआत की है. इसराइली बुलडोज़र गलियों में घुस-घुसकर मकानों को ध्वस्त करने में लगे हैं. प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन के एक प्रवक्ता ने इस कार्रवाई को 'वैध रक्षात्मक कार्रवाई' बताया. एक समाचार एजेंसी को दिए अपने बयान में उन्होंने कहा, "ये कदम इसलिए उठाया जा रहा है जिससे हमारे सैनिक सुरक्षित रहें और गज़ा पट्टी और मिस्र के बीच हथियारों , रॉकेट और मॉर्टर की तस्करी पर रोक लगाई जा सके." लेकिन इन सबके बीच वहां के आम लोग दहशत में हैं. अपने घरेलू सामानों को समेटे हुए ये लोग इसराइली सैनिकों को देखते ही सफेद झंडा लहराने लगते हैं. फ़लस्तीनी वार्ताकार साएब एराकात ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा है कि स्पष्ट संकेत है कि इसराइल गज़ा पट्टी से अपनी सेना हटाना नहीं चाहता. संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता पॉल मैकॉन ने कहा कि ये मानना असंभव है कि हर घर के भीतर चरमपंथी छिपे हुए हैं. उन्होंने इसरायल के इस कदम की निंदा करते हुए कहा कि कुछ लोगों की ग़लती के लिए इसराइल सामूहिक सज़ा दे रहा है. |
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