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'सैनिकों के हाथों हत्याओं की जाँच हो' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ियों का एक गुट अपने रिश्तेदारों की ब्रितानी सैनिकों के हाथों हुई मौत के मामले में कुछ अधिकार पाने में कामयाब रहा है. अदालत के फ़ैसले के बाद अब वे मौत के इन मामलों की जाँच न कराने के ब्रिटेन सरकार के फ़ैसले को चुनौती दे सकते हैं. तेरह इराक़ी परिवारों के वकीलों ने लंदन के हाई कोर्ट में इस बारे में बहस में हिस्सा लिया कि किसी क़ब्ज़ा किए हुए देश में हुई मौतों के मामले को यूरोपीय मानवाधिकार संधि के तहत दर्ज किया जाता है या नहीं, क्या इसका फ़ैसला न्यायाधीशों को करना चाहिए. इन मौतों के मामले में बहा मूसा की हिरासत में हुई मौत का मामला भी शामिल है जिन्हें बसरा के एक होटल से गिरफ़्तार किया गया था. ऐमनेस्टी का आरोप इससे पहले मानवाधिकार संस्था ऐमनेस्टी इंटरनेशनल ने ब्रितानी सैनिकों पर गोलीबारी और इराक़ी नागरिकों को मारने का आरोप लगाया है. संस्था का कहना है उस समय सैनिकों को कोई ख़तरा भी नज़र नहीं आ रहा था. ऐमनेस्टी ने एक साल पहले ख़त्म हुए युद्ध के बाद सैंतीस नागरिकों को मारे जाने के मामलों की स्वतंत्र जाँच की मांग की है. वैसे, ब्रिटेन सरकार का कहना है कि ऐसे सभी मामलों की गहरी जाँच-पड़ताल की जा रही है. |
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