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उत्तर कोरिया के नेता की 'गुप्त चीन यात्रा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ख़बर है कि उत्तर कोरिया के नेता किम जाँग इल चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ से बीजिंग में बातचीत शुरू कर दी है. लेकिन अभी आधिकारिक तौर पर उनकी चीन यात्रा की पुष्टि नहीं की गई है. दक्षिण कोरिया की मीडिया का कहना है कि एक विशेष ट्रेन किम जाँग और एक प्रतिनिधिमंडल को लेकर बीजिंग गई है. उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उठे विवाद में चीन प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. इस मसले पर चीन छह देशों की बातचीत की अगुआई भी कर रहा है लेकिन अभी तक दो दौर की बातचीत में कोई ख़ास प्रगति नहीं हो पाई है. इस बातचीत में चीन और उत्तर कोरिया के अलावा अमरीका, दक्षिण कोरिया, जापान और रूस भी शामिल हैं. आर्थिक बदहाली दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी का कहना है कि किम जाँग और हू जिंताओं के बीच बातचीत उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के साथ-साथ उसकी बदहाल आर्थिक व्यवस्था और खाद्य समस्या पर केंद्रित है. जल्द ही चीन तीसरे दौर की बातचीत की भी तैयारी कर रहा है. बातचीत में विवाद इसको लेकर है कि कैसे उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को ख़त्म किया जाए लेकिन साथ में उसकी सुरक्षा और ऊर्जा संबंधी चिंताओं का भी हल निकले. किम जाँग की यात्रा की पुष्टि किए बिना एक संवाददाता सम्मेलन में चीन के विदेश मंत्री ली झाओशिंग ने कहा, "इस समय बातचीत में शामिल सभी देश एक कार्यदल के गठन के बारे में विचार कर रहे हैं ताकि विवादों का हल निकल सके." उन्होंने कहा कि चीन का रुख़ स्पष्ट है. चीन उत्तर कोरिया की सुरक्षा चिंता का भी हल चाहता है और साथ में यह भी चाहता है कि यह क्षेत्र परमाणु हथियारों से मुक्त हो. जानकारों का कहना है कि उत्तर कोरिया चीन से आर्थिक मदद चाहता है. लेकिन अमरीका का चीन पर दबाव है कि पहले वह उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम का हल निकालने की कोशिश करे. |
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