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उत्तर कोरिया और अमरीका की बातचीत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अक्तूबर 2002 में उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम पर उठे विवाद के बाद अमरीका और उत्तर कोरिया के बीच सीधी बातचीत हुई है. दोनो देशों के बीच ये बातचीत बीजिंग में उत्तर कोरिया के हथियार कार्यक्रम पर हो रही छह देशों के प्रतिनिधियों की वार्ता के साथ-साथ ही हुई है. छह देशों की बातचीत में चीन, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, रूस, अमरीका और जापान भाग ले रहे हैं. बताया जा रहा है कि अमरीका और उत्तर कोरिया के बीच बातचीत लगभग ढाई घंटे चली. उधर दक्षिण कोरिया के प्रतिनिधि ली सू-हियक ने कहा है कि यदि उत्तर कोरिया अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करता है तो दक्षिण कोरिया ने उसे मुआवज़ा देने की पेशकश की है. इस मसले पर पिछले साल अगस्त में भी बातचीत हुई थी लेकिन उसमें कोई नतीजा नहीं निकला था. 'आम राय' चीन ने कहा है कि छह देशों की बैठक में कुछ हद तक आम राय तो बनी है. लेकिन इस बारे में चीन ने विस्तार से कुछ नहीं बताया है. छह देशों की वार्ता से पहले अमरीका ने दोहराया था कि उत्तर कोरिया अपना परमाणु हथियार कार्यक्रम पूरी तरह बंद करे. उधर उत्तर कोरिया के मुख्य प्रतिनिधि ने कहा था कि उनका देश लचीला रुख़ अपना सकता है लेकिन वह अपने सिद्धांतों से नहीं हटेगा. बातचीत शुरू होने से पहले ही उत्तर कोरिया ने माँग कर दी थी कि अगर उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने की बात होती है तो उसे मुआवज़ा दिया जाना चाहिए. लेकिन अमरीका कोई भी मुआवज़ा दिए जाने की संभावना से इनकार करता रहा है. वह कहता आया है कि उत्तर कोरिया पहले अपना हथियार कार्यक्रम बंद करे तभी उसके लिए किसी आर्थिक पैकेज के बारे में सोचा जा सकता है और उसकी सुरक्षा की गारंटी दी जा सकती है. उत्तर कोरिया अमरीका के इन दावों का भी खंडन करता रहा है कि वह परमाणु हथियारों में काम आने वाले यूरेनियम का संवर्धन करने की कोशिश कर रहा है. |
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