|
इसराइल की ख़ुफ़िया एजेंसियों की खिंचाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइल में एक संसदीय रिपोर्ट में देश की ख़ुफ़िया एजेंसियों की इस बात के लिए आलोचना की गई है कि रसायनिक और जैविक हथियारों के बारे में इराक़ की क्षमता के बारे में सही आकलन नहीं कर पाईं. इसराइल की ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद को दुनिया भर में सर्वश्रेष्ठ एजेंसियों में गिना जाता है. इसराइल की एक संसदीय समिति ने जाँच के बाद कहा है कि मोसाद और सैनिक ख़ुफ़िया एजेंसियाँ यह बताने में नाकाम रहीं कि इराक़ के पास महाविनाश के हथियार थे या नहीं. समिति का कहना है और एजेंसियों की यह नाकामी उनके स्तर में भारी गिरावट का सबूत है. इस जाँच रिपोर्ट में कहा गया है कि इसराइल ने पिछले साल इराक़ पर हमले से पहले इराक़ की सैन्य क्षमता के बारे में अमरीका और ब्रिटेन को जानबूझकर गुमराह नहीं किया. समिति का कहना है कि ख़ुफ़िया एजेंसियों ने ग़लती से यह नतीजा निकाल लिया कि इराक़ के पास महाविनाश के हथियार हैं. समिति ने सरकार की इस बात के लिए भी आलोचना की है कि उसने इराक़ पर हमले के दौरान लोगों इसराइल के लोगों को अपने गैस मास्क इस्तेमाल करने का आदेश दिया जिस पर दो करोड़ डॉलर से भी ज़्यादा धन बर्बाद हुआ. लीबिया लीबिया के मामले में भी कहा गया है कि ख़ुफ़िया एजेंसियों को लीबिया के परमाणु कार्यक्रम के बारे में भी कुछ पता नहीं चला. उन्हें तभी पता चला जब ख़ुद लीबिया ने ही यह राज़ खोला. संसदीय समिति ने लीबिया के बारे में एजेंसियों की इस नाकामी को अस्वीकार्य बताया है. संसदीय समिति की इस रिपोर्ट में इसराइल की ख़ुफ़िया एजेंसियों में व्यापक फेरबदल की सिफ़ारिश की है. इस समिति में सभी दलों के सदस्य थे. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||