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क्या है यूरोप-माइक्रोसॉफ़्ट विवाद? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय आयोग ने बाज़ार में अपने प्रभुत्व का नाजायज़ फ़ायदा उठाने के आरोप में कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ़्ट पर भारी जुर्माना लगाया है. माइक्रोसॉफ़्ट को अपने उत्पादों को प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के लिए खोलने के भी निर्देश दिए हैं. माइक्रोसॉफ़्ट के ख़िलाफ़ यूरोपीय आयोग के फ़ैसले में क्या है? यूरोपीय आयोग ने माइक्रोसॉफ़्ट से दरअसल क्या करने को कहा है? माइक्रोसॉफ़्ट पर आरोप है कि वह ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ ख़ुद के ऑडियो-वीडियो प्लेयर लगा कर बाज़ार में अपने प्रभुत्व का ग़लत फ़ायदा उठा रहा है. आयोग चाहता है कि मीडिया प्लेयर का बाज़ार खुला रहे ताकि उपभोक्ताओं के पास अपनी पसंद की कंपनी का प्लेयर चुनने की गुंजाईश हो. लेकिन इससे भी आगे माइक्रोसॉफ़्ट को आयोग ने अपने इस निर्देश से चोट दी है कि वह अपने प्रतिद्वंद्वियों को विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम के कोड उपलब्ध कराए ताकि वे अपने सॉफ़्टवेयर को विंडोज़ के अनुरूप ढाल सकें. माइक्रोसॉफ़्ट क्या करेगा? मामला कब तक खिंच सकता है? |
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