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परमाणु नीति पर ईरान अमरीका से नाराज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएइए) की वियना में हुई बैठक में ईरान के विरूद्ध अमरीकी प्रस्ताव पर बन रही सहमति के विरोध में कड़ी प्रतिक्रिया हुई है. ईरान का कहना है कि यूरोप के तीनों बड़े देशों, ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी अमरीका के दबाव में आ गए हैं और आईएइए ने भी अपना रवैया बदला है. यदि स्थिति नहीं बदली तो ईरान अपनी परमाणु नीति पर पुनर्विचार के लिए मजबूर होगा और आईएइए के साथ सहयोग बंद कर देगा. ईरान के विदेश मंत्री कमाल ख़राज़ी का कहना है कि यदि आईएइए ईरान को दिए गए आश्वासनों पर अमल नहीं करता तो ईरान इस एजेंसी के साथ सहयोग नहीं करेगा. उनके अनुसार गत वर्ष अक्टूबर में ब्रिटेन, जर्मनी और फ़्रांस के विदेश मंत्रियों ने अपनी तेहरान यात्रा के दौरान आश्वासन दिया था कि यदि ईरान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर कर दे तो यूरोपीय देश ईरान के परमाणु शक्ति के शांतिपूर्ण उपयोग का समर्थन करेंगे. दबाव ईरान को आपत्ति है कि यूरोपीय देश अमरीका के दबाव में हैं इसलिए उन्होंने वियना बैठक में अमरीका के प्रस्ताव को स्वीकार किया है. ईरान के अनुसार आईएइए और यूरोपीय देश उसे दिए गए आश्वासन से पीछे हट रहे हैं.
ईरानी विदेश मंत्री ख़राज़ी, रक्षा मंत्री अली शमख़ानी और संयुक्त राष्ट्र में ईरान के दूत पीरोज़ हुसैनी ने आरोप लगाया है कि अमरीका आईएइए में जान-बूझकर ईरान की फ़ाइल बंद नहीं होने दे रहा. उनका कहना था कि अमरीका ऐसा इसलिए कर रहा है ताकि ईरान पर जब चाहे तब दबाव बनाया जा सके. ईरानी अधिकारियों ने ये बात पूरी तरह से स्पष्ट कर दी है कि यदि अमरीका इसी तरह आईएइए पर दबाव डालता रहा तो ईरान को अपनी परमाणु नीति पर पुनर्विचार करना पड़ेगा. आलोचना गत दो-तीन दिनों से ईरान की राजधानी तेहरान में आईएइए के महानिदेशक मोहम्मद अल बरदई के ईरान और लीबिया के परमाणु कार्यक्रमों को एक जैसा बताए जाने पर आलोचना चल ही रही थी कि अमरीका के प्रस्ताव को लगभग अंतिम रूप दिए जाने की ख़बर के बाद आलोचना और बढ़ गई. ईरान के अधिकारियों का कहना है कि लीबिया और ईरान के परमाणु कार्यक्रमों की तुलना नहीं की जा सकती क्योंकि लीबिया ने परमाणु हथियार कार्यक्रम की बात स्वीकार की है जबकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है. इसका प्रमाण अंतरराष्ट्रीय एजेंसी दे चुकी है और ईरान ने इसी कारण से एनपीटी के अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर भी हस्ताक्षर किए हैं. ईरान के विदेशमंत्री कमाल ख़राज़ी ने ये भी कहा है कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन का कार्य अस्थायी रूप से स्थगित किया है. जब भी ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी के संबंध सामान्य हो जाएँगे तभी ईरान फिर से यूरेनियम का संवर्धन आरंभ कर देगा. एकजुटता उल्लेखनीय है कि ईरान में पर्यवेक्षकों का मानना है कि देश के अंदर राजनीतिक विचारों में अंतर्विरोध तो है मगर किसी विदेशी दबाव के सामने पूरा देश एक है. यहाँ के लोगों में सरकार में शामिल लोगों की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी हो सकती है लेकिन जहाँ तक अमरीका या उसके मित्र देशों की ओर से दबाव की बात है तो इसके विरोध में वे आपसी गतिरोध भुला कर सामना करेंगे. इस्लामी क्रांति के मूल में अमरीका विरोध पूरी तरह से जमा है जो जल्दी तो खत्म नहीं ही हो सकती. |
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