|
ईरान की यूरोपीय देशों को चेतावनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान ने यूरोपीय देशों पर आरोप लगाया है कि वे उसके परमाणु कार्यक्रम के बारे में अमरीकी दबाव के सामने टिक नहीं सके हैं. संयुक्त राष्ट्र परमाणु एजेंसी में ईरान के दूत फ़िरोज़ हुसैनी ने कहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में तैयार किया गया मसौदा अमरीकी दबाव का ही नतीजा है. फ़िरोज़ हुसैनी ने कहा है कि अमरीका यह मानने के लिए तैयार ही नहीं है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार बनाने में शामिल नहीं रहा है. उन्होंने कहा है कि ईरान इस मुद्दे पर यूरोपीय देशों से ज़्यादा सहयोग की अपेक्षा करता है लेकिन यूरोपीय देश इसमें नाकाम रहे हैं. इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री कमाल ख़राजी ने कहा था कि अगर यूरोपीय देश अमरीकी दबाव को मुक़ाबला करने में नाकाम रहते हैं तो ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के बारे में संयुक्त राष्ट्र के साथ सहयोग करना बंद कर देगा. उन्होंने यह भी कहा था कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी से विवाद ख़त्म होने के बाद ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का काम फिर शुरू करेगा. ईरान कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ़ शांतिपूर्ण कार्यों के लिए हैं. कमाल ख़राजी ने तेहरान में संवाददाताओं से कहा, "ईरान को यूरेनियम संवर्धन का पूरा अधिकार है." पिछले साल अक्तूबर में ईरान यूरेनियम संवर्धन का कार्यक्रम स्थगित करने की घोषणा की थी. गत सोमवार् को ऊर्जा एजेंसी के अध्यक्ष मोहम्मद अल बारादेई ने कहा था कि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी है, जिसके बाद इस मसले को हल करने के लिए बातचीत शुरू हुई है. इसी प्रक्रिया में एक प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया गया है जिसमें ईरान की आलोचना की गई है लेकिन प्रतिबंध लगाने की दिशा में जून तक कोई कार्रवाई नहीं करने का भी प्रस्ताव किया गया है. इस मसौदे पर ऊर्जा एजेंसी के 35 सदस्यों वाले निदेशक मंडल की इसी सप्ताह होने वाली बैठक में रखा जाएगा. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||