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ईरान में इस्लामी क्रांति के 25 साल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान में शाह को हटाकर इस्लामिक शासन लागू करने वाली क्रांति की पच्चीसवीं वर्षगाँठ मनाई जा रही है. ये क्रांति दिवंगत आयतुल्ला ख़ुमैनी के नेतृत्व में हुई थी. वह उस समय निर्वासन से लौटे थे और राजधानी तेहरान में लगभग 30 लाख लोगों ने उनका स्वागत किया था. लाखों लोग राजधानी तेहरान और अन्य शहरों में इकट्ठा हुए हैं. ज़्यादातर लोग इस्लामी क्रांति के नेता दिवंगत आयतुल्ला ख़ुमैनी और मौजूदा सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्ला ख़मेनेई की तस्वीरें हाथों में थामे हुए थे. राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी ने इस मौक़े पर एक रैली को संबोधित किया जिसमें उन्होंने कट्टरपंथियों को निशाना बनाते हुए कहा कि लोगों के अधिकारों की अनदेखी कर रहे हैं और देश के हितों के ख़िलाफ़ काम कर रहे हैं. तेहरान में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राष्ट्रपति का इशारा साफ़तौर पर मौजूदा राजनीतिक संकट की तरफ़ था. लेकिन भीड़ में से इस मुद्दे पर कोई ख़ास गर्मजोशी नज़र नहीं आई क्योंकि ज़्यादातर लोग कट्टरपंथी विचारधारा और नेताओं से लगाव रखते हैं. हक़ीक़त कुछ विश्लेषकों का कहना है कि उनके पास ख़ुशियाँ मनाने की ज़्यादा वजहें नहीं हैं क्योंकि ईरान इस समय एक तरह के राजनीतिक संकट से गुज़र रहा है. इसी महीने होने वाले संसदीय चुनाव को लेकर सुधारवादियों और कट्टरपंथियों के बीच ठनी हुई है. कट्टरपंथियों की संस्था शूरा-ए-निगहबान ने लगभग 2000 लोगों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है. तेहरान में मौजूद बीबीसी संवाददाता जिम म्युअर का कहना है कि कोई नहीं जानता कि देश भविष्य में किस दिशा में जाएगा. हमारे संवाददाता के अनुसार 1997 से सुधारवादियों को जिस तरह चुनाव में बड़ी सफलताएँ मिल रही हैं उसे लोग क्रांति में ही एक दूसरी तरह की क्रांति मानते हैं. शाह को 1979 में सत्ता से हटाने के बाद जिस तरह उलेमा ने सत्ता पर क़ब्ज़ा मज़बूत कर लिया था उसे देखते हुए सुधारवादियों से कुछ आज़ादी की उम्मीद की जा रही थी. मगर शक्तिशाली कट्टरपंथियों ने ये सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश की है कि सत्ता में रहने के बावजूद सुधारवादी बहुत कुछ नहीं कर सकें. बीबीसी संवाददाता के अनुसार शांतिपूर्ण तरीक़े से सत्ता में परिवर्तन की उम्मीदें फिलहाल तो नहीं दिखतीं और कुछ लोग तो परिवर्तन के लिए अब हिंसा के रास्ते से भी इनकार नहीं करते. |
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