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ईरान में चुनाव को लेकर गतिरोध
ईरान के राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी का कहना है कि सुधारवादियों के संसदीय चुनाव में खड़े होने पर कट्टरपंथियों के प्रतिबंध के कारण गतिरोध उत्पन्न हो गया है. उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी और ईरान के गृह मंत्री अब्दुल वहीद मुसावी-लारी ने स्पष्ट रूप से घोषणा करते हुए कहा," स्वतंत्र और प्रतिस्पर्धी चुनाव की संभावना नहीं हैं." उनका कहना था कि वे इन चुनावों को वैध नहीं मानते हैं. ईरान में 20 फरवरी को आम चुनाव होने हैं. सुधारवादियों में इस बात को लेकर ग़ुस्सा है कि कट्टरपंथी मुसलमानों की संस्था शूरा-ए-निगहबान ने कई कोशिशों के बावजूद तीन हज़ार से अधिक प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने के अयोग्य करार दिया है. गृह मंत्री का कहना है कि शनिवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई गई है जिसमें इस विषय में चर्चा की जाएगी. चुनाव में प्रतिबंधों का सुधारवादी सांसद कड़ा विरोध कर रहे हैं क्योंकि इसके तहत लगभग 80 सांसदों को फिर से चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहरा दिया गया है. इससे पहले शूरा-ए-निगहबान ने चुनाव में सुधारवादियों को हिस्सा लेने देने से जुड़े विधेयक पर 'वीटो' कर दिया था. ईरान की संसद ने सुधारवादी प्रत्याशियों पर लगा प्रतिबंध हटाने और चुनाव नियम बदलने वाला एक विधेयक पिछले दिनों पारित किया था. सांसदों की एक आपातकालीन बैठक में हस्तक्षेप का ये फ़ैसला किया गया था और इस विधेयक पर शूरा-ए-निगहबान को सहमति देनी थी मगर उसने ऐसा नहीं किया. संसद में पारित विधेयक के अनुसार जो लोग पिछला चुनाव लड़ सके थे वे एक बार फिर चुनाव में भाग्य आजमा सकते थे. ईरान में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये देश के अब तक के सबसे गंभीर राजनीतिक संकटों में से एक है. |
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