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बुधवार, 14 जनवरी, 2004 को 23:51 GMT तक के समाचार
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ख़मेनेई की फिर से विचार की अपील
आयतुल्ला अली ख़मेनेई
आयतुल्ला अली ख़मेनेई ने सुधारवादियों के चुनाव में खड़े होने पर लगा प्रतिबंध हटाने की अपील की

ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्ला अली ख़मेनेई ने चुनाव में खड़े हो रहे सैकड़ों प्रत्याशियों पर प्रतिबंध के फ़ैसले पर फिर से विचार करने की अपील की है.

सरकारी टेलीविज़न के अनुसार ख़मेनेई ने कट्टरपंथी धर्मगुरुओं की सभा शूरा-ए-निगहबान की एक बैठक में इसकी अपील की.

इस सभा ने फ़रवरी में होने वाले संसदीय चुनाव के लिए लगभग 2,000 सुधारवादियों को प्रत्याशी होने के अयोग्य करार दिया था.

संवाददाताओं के अनुसार ख़मेनेई का ये हस्तक्षेप सुधारवादियों की जीत के तौर पर देखा जा रहा है. ये सुधारवादी अपनी माँगों के साथ संसद पर धरना देकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

ख़मेनेई ने कहा, "किसी के भी अधिकारों का हनन न हो इसलिए हर मामले पर विचार करने के लिए शूरा-ए-निगहबान के पास काफ़ी वक़्त है."

उन्होंने उन लोगों का भी समर्थन किया है जिन 83 लोगों ने चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगने के बाद ईरान की संसद मजलिस छोड़ने से ही इनकार कर दिया था.

ख़मेनेई ने कहा, "अगर उन लोगों की क्षमता पहले साबित हो चुकी है तो सिद्धांत के अनुसार तो वह तब तक योग्य हैं जब तक वे अयोग्य साबित नहीं हो जाते."

मगर सर्वोच्च नेता ने ये भी कहा कि सभा को अपना फ़ैसला उन लोगों की वजह से नहीं बदलना चाहिए जो ज़ोर-ज़बरदस्ती करके ऐसा करवाना चाहते हों.

ख़ातमी का दबाव

तेहरान में मौजूद बीबीसी संवाददाता जिम म्युअर के अनुसार ख़मेनेई के इस संदेश के बाद शूरा-ए-निगहबान को फिर से विचार का मौक़ा भी मिल गया है जिससे वह कुछ फ़ैसले बदल सके.

 अगर उन लोगों की क्षमता पहले साबित हो चुकी है तो सिद्धांत के अनुसार तो वह तब तक योग्य हैं जब तक वे अयोग्य साबित नहीं हो जाते

आयतुल्ला अली ख़मेनेई

आयतुल्ला ख़मेनेई की बात ही हर मामले में अंतिम तौर पर मानी जाती है और अब तक वह इस विवाद से दूरी ही रखे थे.

शूरा-ए-निगहबान 12 सदस्यों की एक परिषद होती है जिसमें उलेमा और धर्म गुरु शामिल होते हैं. ये सभा देखती है कि संसद की कार्रवाई इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार ही हो.

उधर संसद के अध्यक्ष मेंहदी करूबी ने परिषद पर आरोप लगाया है कि वह फ़रवरी के चुनाव का नतीजा पहले ही तय करने की कोशिश कर रही है.

सुधारवादियों के समर्थक माने जाने वाले राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी ने वायदा किया था कि वह सभा का फ़ैसला बदलवाने की पूरी कोशिश करेंगे मगर उन्होंने संसद में चल रहा धरना समाप्त करने की अपील भी की थी.

उन्होंने संसद में कहा था कि वह लोगों के अधिकारों और धार्मिक लोकतंत्र की रक्षा करने के लिए हर संभव क़दम उठाएँगे.

ख़ातमी ने धमकी दी थी कि अगर सुधारवादियों पर लगा प्रतिबंध हटाया नहीं गया तो उनका पूरा का पूरा मंत्रिमंडल ही इस्तीफ़ा दे देगा.

मगर दूसरी तरफ़ एक सांसद मोहसिन आर्मिन ने कहा कि जब तक परिषद अपना फ़ैसला नहीं बदलती तब तक धरना चलता रहेगा.

संवाददाताओं के अनुसार इस बात की संभावना तो है कि कुछ लोगों को फिर से चुनाव लड़ने के योग्य ठहरा दिया जाए मगर रोचक ये देखना होगा कि क्या इस स्थिति में सुधारवादी संतुष्ट हो जाएँगे.

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