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इराक़ में अंतरिम संविधान को मंज़ूरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ी शासकीय परिषद के सदस्यों ने अंतरिम संविधान को मंज़ूरी दे दी है. अंतरिम संविधान का उद्देश्य देश में एक बुनियादी राजनीतिक व्यवस्था क़ायम करना है ताकि जून की समयसीमा तक अमरीका इराक़ियों को देश की सत्ता सौंप दे. राजधानी बग़दाद में हुए एक समारोह में शासकीय परिषद के 25 सदस्यों ने इसे मंज़ूरी दे दी. परिषद के अध्यक्ष मोहम्मद बहर अल उलूम ने इसे ऐतिहासिक मौक़ा कहा है. यह अंतरिम संविधान जुलाई से लागू होगा और तब तक क़ायम रहेगा जब तक इराक़ी लोगों द्वारा सीधे चुनी गई संसद कोई स्थायी संविधान को मंज़ूरी नहीं देती. इस मौक़े पर इराक़ में अमरीकी प्रशासक पॉल ब्रेमर भी मौजूद थे. समारोह के ठीक पहले बग़दाद में तीन धमाके भी हुए. देरी अंतरिम संविधान पर दस्तख़त करने में दो बार देरी हुई.
पहली बार उस समय जब मुहर्रम के जुलूस के दौरान हुए धमाके के कारण क़रीब 180 लोग मारे गए. दूसरी बार इसमें देरी शिया नेताओं की आपत्ति के कारण हुई जो अंतरिम संविधान के कुछ हिस्से से नाराज़ थे. लेकिन शिया धार्मिक नेता आयतुल्ला अल सिस्तानी और शासकीय परिषद के सदस्यों के बीच बातचीत के बाद शिया सदस्य दस्तख़त के लिए राज़ी हुए. शिया नेताओं को संविधान के उस हिस्से पर आपत्ति है जिसमें कुर्दों जैसे देश के अल्पसंख्यक समुदाय को वीटो का अधिकार दिया गया है. इराक़ में सुप्रीम काउंसिल के एक प्रतिनिधि अब्दुल अदेल महदी ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस को बताया कि शिया नेताओं की आपत्तियों का निदान नहीं निकला है लेकिन इसके कारण अंतरिम संविधान पर दस्तख़त में देरी नहीं की जाएगी. |
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