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ग़ज़ा से टैंक पीछे हटे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइली सेना ग़ज़ा पट्टी के दो फ़लस्तीनी शरणार्थी शिविरों से पीछे हट गई है. शनिवार रात को इसराइल की सेना ने अल बुरेज और नुसीरात नाम के दो शरणार्थी शिविरों पर हमला किया था जिनमें 14 लोगों की मौत हो गई थी. इन शिविरों पर हुए हमले से ग़ज़ा में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. हमला शनिवार को रात के अंधेरे में सेना के हेलिकॉप्टर और टैंक मध्य गज़ा के फ़लस्तीनी इलाक़ों में आगे बढ़े. इसराइली सेना का कहना है कि उन पर भी टैंकभेदी मिसाइलों से हमला किया गया और ग़ज़ा की गलियों में उनके और फ़लस्तीनी चरमपंथियों के बीच जमकर गोलीबारी हुई. इसराइल के अनुसार दस फ़लस्तीनी चरमपंथी मारे गए. दूसरी ओर फ़लस्तीनी डॉक्टरों का कहना है कि इस हमले में 16 साल से कम उम्र के तीन बच्चे भी मारे गए, जिनमें से सबसे कम उम्र का बच्चा सिर्फ़ आठ साल का था. इसराइली सेना का कहना है कि उसका एक भी सैनिक ज़ख़्मी नहीं हुआ. प्रतिक्रिया हमले में मारे गए फ़लस्तीनियों के जनाज़े में हज़ारों फ़लस्तीनी शामिल हुए जिनमें चेहरों पर मुखौटा लगाए हाथों में बंदूकें पकड़े कुछ चरमपंथी भी शामिल थे. कहा जा रहा है कि लोगों में जो रोष है उसका फ़ायदा चरमपंथी संगठन उठा सकते हैं. ग़ज़ा में बीबीसी के संवाददाता जेम्स रॉजर्स का कहना है कि इसराइल चाहता था कि सेना के फ़लस्तीनी इलाक़ों से पीछे हटने से पहले वो फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठनों को और कमज़ोर कर दे – हालांकि आधिकारिक तौर पर इसराइली अधिकारी इसको मानने से इंकार करते हैं. इसराइल सरकार के प्रवक्ता अवि पाज़नर का कहना है कि इसराइल ने इन शरणार्थी कैंपों से फैलने वाले चरमपंथ पर रोक लगाने के लिए ये क़दम उठाए हैं. |
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